सिस्टम की अंधेरगर्दी: सड़क पर मौत के खंभे! नियमों को डामर में गाड़कर ठेकेदार ने सड़क से सटाए बिजली के पोल

Update: 2026-02-17 08:49 GMT

 ​आकोला ( रमेश चंद्र डाड) कोटड़ी-नन्दराय मार्ग पर पीडब्ल्यूडी और विद्युत विभाग की जुगलबंदी राहगीरों की जान की दुश्मन बन गई है। मंशा-हाजीवास रोड पर वर्तमान में ठेकेदार द्वारा बिछाई जा रही बिजली लाइन के पोल नियमों को ताक पर रखकर डामर सड़क के बिल्कुल सीने पर गाड़े जा रहे हैं। विभाग की यह सुस्ती और ठेकेदार की मनमानी किसी बड़े सड़क हादसे को खुला निमंत्रण दे रही है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि जिम्मेदार अधिकारी सब कुछ जानकर भी अपनी आँखें मूंदे बैठे हैं।

​पुरानी गलती से नहीं लिया सबक: एक साल से फाइलों में दबी 'शिफ्टिंग'

​सरकारी तंत्र की बेपरवाही का आलम यह है कि पिछले साल जब कोटड़ी-नन्दराय रोड का निर्माण कार्य चल रहा था, तभी इन पोलों को हटाया जाना प्रस्तावित था। सड़क की चौड़ाई बढ़ गई, डामर बिछ गया, लेकिन 'मौत के ये खंभे' टस से मस नहीं हुए। विभाग ने सड़क निर्माण के दौरान इन्हें शिफ्ट करना जरूरी नहीं समझा, जिसका नतीजा यह है कि पुराने पोल अब सड़क के सुरक्षित दायरे के भीतर घुस आए हैं।

​इंजीनियरिंग फेल या ठेकेदार की दबंगई?

​नियम कहते हैं कि बिजली के पोल और डामर सड़क के बीच सुरक्षित दूरी (शोल्डर मार्जिन) होनी चाहिए, ताकि वाहन अनियंत्रित होने पर सीधे पोल से न टकराए। मगर यहाँ तो उलटी गंगा बह रही है। मंशा-हाजीवास रोड पर ठेकेदार डामर की अंतिम परत से सटाकर पोल खड़े कर रहा है। रात के अंधेरे में या तेज रफ्तार वाहनों के लिए ये पोल किसी 'खूनी अवरोध' से कम नहीं हैं। दो वाहनों के आमने-सामने आने पर साइड देने की कोई जगह नहीं बची है।

हादसा हुआ तो कातिल कौन?

​सड़क सुरक्षा के दावों की हवा निकालती यह तस्वीर चीख-चीख कर कह रही है कि विभाग को जनता की जान से ज्यादा ठेकेदार की सुविधा की चिंता है। अगर यहाँ कोई वाहन इन पोलों से टकराकर दुर्घटनाग्रस्त होता है और जान-माल की हानि होती है, तो क्या इसकी जिम्मेदारी विद्युत विभाग के अधिकारी और सड़क निर्माण करने वाली एजेंसी लेंगे?

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