सरकार के पास बजट की कमी नहीं, पर समाज की सच्ची शक्ति भाविप जैसे सेवा संगठनों में - सांसद अग्रवाल

Update: 2026-02-14 13:30 GMT

 

भीलवाड़ा  । "जहाँ संवेदनाएं सक्रिय होती हैं, वहीं ईश्वर का वास होता है।" शहर के काशीपुरी वकील कॉलोनी माहेश्वरी भवन में तीन दिनों से जारी सेवा, त्याग और आत्मीयता के 'दिव्यांग सहायता शिविर' का शनिवार को भव्य समापन हुआ। भारत विकास परिषद की विवेकानंद शाखा के इस 56वें शिविर के अंतिम दिन का दृश्य भावुक कर देने वाला था। मुख्य अतिथि सांसद दामोदर अग्रवाल ने जब कृत्रिम अंगों के सहारे दिव्यांगों को आत्मनिर्भर बनते देखा, तो उन्होंने इसे मानवता की सबसे बड़ी इबादत करार दिया। यह शिविर केवल चिकित्सा सहायता मात्र नहीं था, बल्कि एक पिता द्वारा अपने दिवंगत पुत्र की स्मृति में समाज को दिया गया वो संबल था, जिसने हजारों परिवारों के अंधेरे जीवन में उम्मीद का नया सूरज उगा दिया है। भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति और मुख्य भामाशाह रामेश्वर लाल काबरा के सहयोग से आयोजित शिविर में मुख्य अतिथि सांसद दामोदर अग्रवाल ने दीप प्रज्ज्वलन कर समारोह की शुरुआत की। समारोह को संबोधित करते हुए सांसद दामोदर अग्रवाल ने कहा कि आज का यह नजारा अद्भुत है। उन्होंने मुख्य भामाशाह रामेश्वर लाल काबरा के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा, "भारत विकास परिषद ने अब तक 56 शिविर लगाए हैं, जिनमें से 40 शिविरों के अकेले प्रायोजक रामेश्वर काबरा और उनका परिवार रहा है। अपने पुत्र मनीष की असामयिक दुर्घटना के बाद उस शोक को शक्ति में बदलकर हजारों दिव्यांगों के जीवन को संवारने का निर्णय लेना, मनीष की आत्मा की शांति का असली मार्ग है।" सांसद अग्रवाल ने दिव्यांग कल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि केंद्र की मोदी सरकार ने दिव्यांगों के लिए 5000 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान किया है। वहीं, राज्य की भजनलाल सरकार भी संसाधनों की कोई कमी नहीं रहने देगी। उन्होंने घोषणा की कि आने वाले समय में सांसद कोष से भी दिव्यांग जनों की हरसंभव सहायता की जाएगी। उन्होंने परिषद, समिति और काबरा परिवार के इस संगम को 'सेवा की त्रिवेणी' बताया। शिविर के दौरान लगभग दिव्यांगों को 'जयपुर फुट', कृत्रिम हाथ और व्हीलचेयर प्रदान कर उन्हें नया जीवन दिया गया। इस अवसर पर भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति की तकनीकी टीम और मुख्य भामाशाह परिवार का स्मृति चिन्ह देकर भावभीना सम्मान किया गया। शाखा अध्यक्ष गिरीश अग्रवाल और वरिष्ठ सदस्य गोविंद प्रसाद सोडाणी ने बताया कि जयपुर से आई अतिरिक्त टीम के कारण इस बार रिकॉर्ड संख्या में लाभार्थियों को लाभ पहुंचा है।

समापन समारोह में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की उपनिदेशक नूतन शर्मा, उद्योगपति तिलोक चंद छाबड़ा, दिनेश नौलखा, जयकिशन बल्दवा, शाखा सचिव कैलाश डाड, भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति के फाइनेंसिंग मार्केटिंग मैनेजर डॉ. केएस पारीक सहित शहर के गणमान्य नागरिक और परिषद के सदस्य उपस्थित रहे। शिविर के अंत में जब लाभार्थी अपने नए कृत्रिम अंगों के सहारे बिना किसी मदद के सभा स्थल से बाहर निकले, तो उनकी आंखों की चमक और चेहरे की मुस्कान ने इस आयोजन की सार्थकता पर मुहर लगा दी। संचालन रजनीकांत आचार्य ने किया।

56वें दिव्यांग सहायता शिविर की उपलब्धियां

कुल पंजीकरण 2000, प्रत्यक्ष लाभान्वित 1470, श्रवण यंत्र (कान की मशीन) 330, ट्राई साइकिल 147, व्हीलचेयर 140, कृत्रिम पैर 111, कैलीपर्स 92, बैसाखियां 87, स्टिक 163, इलेक्ट्रॉनिक छड़ी 28, वाकर 29, कृत्रिम हाथ 20, दंत चिकित्सा परामर्श 285, यूडीआईडी कार्ड पंजीकरण 73, रोडवेज बस पास 32 को जारी किए गए। शिविर के माध्यम से हजारों दिव्यांगों को न केवल उपकरण मिले, बल्कि उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सरकारी योजनाओं का लाभ भी सुनिश्चित किया गया।

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