सकल हिन्दू समाज की एकता और जागृति सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए आवश्यक: आचार्य मणि प्रभ सागर
बड़लियास (रोशन वैष्णव) । भारतीय सभ्यता और संस्कृति का इतिहास अत्यंत गौरवशाली रहा है। वर्तमान के बदलते परिवेश और वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए सकल हिन्दू समाज को एकता और जागृति के साथ योजनाबद्ध तरीके से कार्य करना होगा। सत्य, अहिंसा और अपरिग्रह के मार्ग पर चलकर ही विश्व में शांति स्थापित की जा सकती है।
यह प्रेरक विचार सोमवार शाम को बरूंदनी-सिंगोली मार्ग स्थित मातेश्वरी सोमानी (कुदाल) परिसर में आयोजित धर्मसभा के दौरान आचार्य जिन मणि प्रभ सागर सूरीश्वर महाराज ने व्यक्त किए।
भक्ति की पूंजी ही साथ जाएगी
धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि केवल धन-संपदा एकत्रित करने से जीवन का कल्याण संभव नहीं है। यदि संचय करना ही है, तो भगवान की भक्ति का संचय करें, क्योंकि अंत समय में वही साथ जाएगी। उन्होंने भगवान कृष्ण के साथ अर्जुन और सूरदास के प्रसंगों की व्याख्या करते हुए समझाया कि संसार में सब कुछ ईश्वर की कृपा से ही घटित हो रहा है। उन्होंने श्रद्धालुओं का आह्वान किया कि वे चंचल मन की सुनने के बजाय अपनी आत्मा की पुकार सुनें और भक्ति मार्ग को अपनाएं।
बरूंदनी में भव्य अगवानी और प्रवास
आचार्य मणि प्रभ सागर, गणिवर्य मयंक प्रभ सागर एवं मुनि विरक्त प्रभ सागर आदि ठाणा-3 के बरूंदनी पहुंचने पर माहेश्वरी समाज द्वारा भव्य अगवानी की गई। श्रद्धालुओं के विशेष आग्रह पर आचार्य श्री ने व्याख्यान दिया। कार्यक्रम के दौरान:
शिक्षाविद प्रभु लाल सोमानी ने बरूंदनी के ऐतिहासिक महत्व, भौगोलिक स्वरूप और पांडवों के भंवरिया से जुड़ी जानकारी साझा की।
गायिका निशा हींगड (भीलवाड़ा) ने 'पल-पल साथ निभाया' गीत की प्रस्तुति देकर माहौल को भक्तिमय कर दिया।
प्रमुख जनों की उपस्थिति
इस अवसर पर माहेश्वरी समाज अध्यक्ष राम राय लड्ढा, व्यापार मंडल अध्यक्ष राजेन्द्र कुमार लड्ढा, पूर्व सरपंच लादू राम सोमानी, घनश्याम सारस्वत, नीरज पाराशर, नन्द किशोर सोमानी, जगदीश तुरकिया, सुशीला असावा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। भीलवाड़ा से भी राजेंद्र बिरानी, निर्मल कुमार जैन और अरुण कोठारी सहित अनेक श्रावक-श्राविकाएं सेवा हेतु पहुंचे।
आगामी कार्यक्रम और विहार
केवाईयूपी के राष्ट्रीय संयोजक समित धूनीवाल ने बताया कि सोमवार तड़के बतखों का खेड़ा से विहार कर आचार्य श्री गेंदलिया, जीत्या माफी, बड़लियास और बिलोड होते हुए बरूंदनी पहुंचे थे। सोमवार शाम 5 बजे उन्होंने बिछोर के लिए विहार किया।
11 मार्च: रामगंज मंडी में जिनालय प्रतिष्ठा समारोह।
19 से 26 अप्रैल: नीमच में आयोजित समारोह।
इसके पश्चात महाराष्ट्र और गुजरात होते हुए आचार्य श्री हैदराबाद जाएंगे, जहां उनका चातुर्मास प्रवास होगा।
गौरतलब है कि आचार्य श्री की ख्याति देशभर में है। हाल ही में जैसलमेर के चादर महोत्सव में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने भी उनसे भेंट की थी।
