नई दिल्ली/तेहरान। अमेरिका और इजरायली हमलों के बाद ईरान में उपजे गहरे सत्ता संकट के बीच आखिरकार नए सर्वोच्च नेता के नाम पर मुहर लग गई है। अयातुल्ला अली खामनेई की मृत्यु के बाद, उनके बेटे मोजतबा खामनेई को ईरान का नया सुप्रीम लीडर चुन लिया गया है। मोजतबा को पहले से ही इस पद के लिए उत्तराधिकारी की दौड़ में सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा था।
चुनौतियों से भरा नया कार्यकाल
मोजतबा खामनेई के लिए सत्ता की राह आसान नहीं दिख रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ईरान में अब वह पुराना कट्टर समर्थक आधार नहीं बचा है, जो पहले हुआ करता था। भ्रष्टाचार, आर्थिक कुप्रबंधन और शासन की दमनकारी नीतियों के कारण पिछले कुछ दशकों में आम जनता का मोहभंग हुआ है। ऐसे में नए नेतृत्व के लिए देश में स्थिरता बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होगी।
जनसमर्थन में भारी गिरावट
उल्लेखनीय है कि 1979 की इस्लामी क्रांति के समय जिस व्यवस्था को लाखों ईरानियों का अटूट समर्थन हासिल था, वह अब कमजोर पड़ता दिख रहा है। हालांकि, शासन के प्रति वफादार एक विशेष वर्ग अभी भी मौजूद है, लेकिन बढ़ते आंतरिक असंतोष और बाहरी हमलों ने शासन की जड़ों को हिलाकर रख दिया है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि मोजतबा खामनेई ईरान को इस संकट से कैसे बाहर निकालते हैं।
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