बड़ी हलचल:: चीन से निकले ईरानी जहाजों ने बढ़ाई दुनिया की धड़कन, क्या फिर बरसेगी आग?
दिल्ली। खाड़ी देशों में जारी भीषण युद्ध (ऑपरेशन एपिक फ्युरी) के बीच चीन के गाओलान पोर्ट से रवाना हुए ईरान के दो मालवाहक जहाजों ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हड़कंप मचा दिया है। वाशिंगटन पोस्ट और सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण से पता चला है कि इन जहाजों में ऐसा घातक केमिकल लदा है, जो ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को दोबारा जिंदा कर सकता है।
मिसाइल ईंधन और रॉकेट बनाने का सामान?
रिपोर्ट्स के अनुसार, 'शब्दीश' और 'बरज़ीन' नाम के ये जहाज 'सोडियम परक्लोरेट' लेकर ईरान की ओर बढ़ रहे हैं। यह वही केमिकल है जो सॉलिड रॉकेट फ्यूल (ठोस रॉकेट ईंधन) बनाने के लिए अनिवार्य है। हाल ही में अमेरिका और इजरायल के हमलों में ईरान के मिसाइल निर्माण केंद्रों को भारी नुकसान पहुँचा था, जिसके बाद ईरान के लिए यह खेप 'जीवनदान' जैसी मानी जा रही है।
चीन क्यों कर रहा है ईरान की मदद?
विशेषज्ञों का कहना है कि चीन ने इन जहाजों को पोर्ट पर रोकने के बजाय जानबूझकर रवाना होने दिया। इसके पीछे कई बड़े कारण हैं:
* रणनीतिक समझौता: जनवरी 2026 में ही ईरान, चीन और रूस ने एक बड़ा रणनीतिक समझौता किया है।
* सस्ता तेल: चीन अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए ईरान से भारी छूट पर तेल खरीद रहा है।
* अमेरिकी वर्चस्व को चुनौती: चीन चाहता है कि अमेरिका मध्य पूर्व के इस संघर्ष में उलझा रहे, ताकि वह ताइवान जैसे अन्य मोर्चों पर ध्यान न दे सके।
क्या रास्ते में ही तबाह होंगे जहाज?
अमेरिका और इजरायली नौसेना इस समय 'हाई अलर्ट' पर हैं। हालांकि, चीन के सामान वाले जहाजों पर सीधा हमला करना तीसरे विश्व युद्ध को न्योता देने जैसा होगा। फिर भी, अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज इन जहाजों को अंतरराष्ट्रीय समुद्र (High Seas) में रोककर उनकी तलाशी ले सकती हैं या माल को जब्त कर सकती हैं। यदि ये जहाज ईरान के शाहिद रजाई पोर्ट तक सुरक्षित पहुँच गए, तो ईरान की मिसाइल मारक क्षमता फिर से बढ़ जाएगी, जिससे यह जंग और भी लंबी खिंच सकती है।
