बजट से पहले शिक्षा मंत्री और वित्त मंत्री की बैठक, स्कूली और उच्च शिक्षा पर चर्चा
नई दिल्ली । केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने गुरुवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की। केंद्रीय बजट से पहले हुई यह मुलाकात काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस मुलाकात के दौरान शिक्षा मंत्री ने शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी आकांक्षाओं को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ साझा किया। उन्होंने वित्त मंत्री के साथ स्कूली शिक्षा तथा उच्च शिक्षा से जुड़े विषयों पर बात की। उन्होंने स्कूली व उच्च शिक्षा के इकोसिस्टम के समग्र रूपांतरण के लिए विभिन्न विचारों और प्रस्तावों पर विस्तृत चर्चा की। बता दें कि बीते वर्षों के दौरान शिक्षा के क्षेत्र में कई उल्लेखनीय बजटीय घोषणाएं की गई हैं। बजट में रिसर्च व बच्चों को शुरुआती स्तर से ही सीखने को लेकर कई प्रावधान किए गए थे। गुरुवार को हुई इस बैठक के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बजट में शिक्षा को अच्छे आवंटन की उम्मीद जताई।
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि मोदी सरकार की परंपरा के अनुरूप बजट 2026–27 में शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास के क्षेत्र में पहले से कहीं अधिक बड़े और साहसिक निवेश देखने को मिलेंगे। उन्होंने कहा कि ऐसे निवेश रोजगार-आधारित विकास को गति देंगे।
धर्मेंद्र प्रधान का कहना है कि शिक्षा में यह निवेश ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। वहीं गुरुवार को शिक्षा मंत्रालय में स्कूल प्रबंधन विकास समिति–2026 के गठन से संबंधित मसौदा दिशा-निर्देशों पर एक प्रस्तुति की समीक्षा भी की गई। इस पर शिक्षा मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 की भावना के अनुरूप सरकार विद्यालय प्रशासन को अधिक सहभागी बनाने व स्कूलों की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने शैक्षणिक उद्देश्यों की प्राप्ति सुनिश्चित करने, विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों को सशक्त करने तथा विद्यालयी इकोसिस्टम को मजबूत करने की बात कही है। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि स्कूल प्रबंधन समितियां (एसएमसी) प्रभावी स्कूल प्रशासन की महत्वपूर्ण उत्प्रेरक हैं। ये समितियां शैक्षणिक परिणामों में सुधार व जवाबदेही बढ़ाने में मदद करती हैं।
इसके अलावा शिक्षा में समानता सुनिश्चित करने, अभिभावकों और समुदाय की आवाज को निर्णय प्रक्रिया में शामिल कराने का काम भी करती हैं। साथ ही स्कूल प्रबंधन समितियां विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था को सशक्त बनाने में भी अहम भूमिका निभाती हैं।
