जाट पट्टी के गांवों में चोरों का आतंक, पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सुलगते सवाल
रतनगढ़ (ईश्वर व्यास)। जाट रतनगढ़ पट्टी के गांवों में इन दिनों 'चोर गिरोह' के आतंक से ग्रामीण खौफजदा हैं। एक तरफ जहां अफीम की लुवाई का संवेदनशील समय चल रहा है और किसान खेतों में पसीना बहा रहा है, वहीं दूसरी ओर रात होते ही हाथों में लाठियां लेकर अपने गांवों की रखवाली करने को मजबूर है। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस प्रशासन इस गंभीर स्थिति में भी चैन की नींद सो रहा है।
एनडीपीएस में 'सफलता' तो चोरियों में 'विफलता' क्यों?
क्षेत्रवासियों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस एनडीपीएस (NDPS) के मामलों में तो आए दिन बड़ी 'सफलता' के दावे करती है और आनन-फानन में केस सुलझा लेती है, लेकिन जब बात किसानों के घरों और गांवों में हुई पुरानी चोरियों की आती है, तो पुलिस के हाथ खाली नजर आते हैं। आज तक पिछली कई बड़ी चोरियों का खुलासा नहीं हो पाना पुलिस की नीयत और कार्यक्षमता पर सवालिया निशान लगा रहा है।
सीसीटीवी फुटेज ने खोली गश्त के दावों की पोल
ग्राम चावंडिया से सामने आए सीसीटीवी फुटेज ने पुलिस की गश्त के दावों की हवा निकाल दी है। लुहारिया, जाट, मुकेरा, साण्डा और डोरई जैसे गांवों में रात के अंधेरे में नकाबपोश संदिग्धों का घूमना यह साबित करता है कि चोरों के हौसले बुलंद हैं। ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि पुलिस की मौजूदगी केवल मुख्य सड़कों तक सीमित है, जबकि अपराधी गलियों में बेखौफ घूम रहे हैं।
किसानों की दो टूक: "कागजी गश्त नहीं, असली सुरक्षा चाहिए"
किसानों ने प्रशासन को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अफीम लुवाई के इस दौर में यदि किसी भी किसान के साथ कोई अप्रिय घटना हुई या फसल की चोरी हुई, तो इसकी सीधी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की होगी। ग्रामीणों ने निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी हैं:
पुरानी चोरियों की फाइलें फिर से खोली जाएं और अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजा जाए।
केवल एनडीपीएस केसों तक सीमित रहने के बजाय आम जनता की जान-माल की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए।
रात के समय गांवों की गलियों तक पुलिस की प्रभावी गश्त सुनिश्चित की जाए।
