काशीपुरी धाम में आस्था का संगम:: षटतिला एकादशी और मकर संक्रांति पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, 'जय श्री श्याम' से गूंजा भीलवाड़ा
भीलवाड़ा। शहर के काशीपुरी धाम स्थित श्री श्याम मंदिर में रविवार को षटतिला एकादशी और मकर संक्रांति के पावन संयोग पर आस्था का अनूठा नजारा देखने को मिला। कड़ाके की ठंड और शीतलहर के बावजूद बाबा श्याम के प्रति अटूट श्रद्धा भक्तों को मंदिर खींच लाई। सुबह की पहली किरण के साथ ही दर्शनों के लिए लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं।
बाबा का मनमोहक श्रृंगार बना आकर्षण का केंद्र
पर्व के उपलक्ष्य में श्री श्याम मंदिर को विशेष रूप से फूलों और विद्युत सज्जा से सजाया गया। बाबा श्याम का अलौकिक और आकर्षक श्रृंगार किया गया, जिसकी छवि देख भक्त भाव-विभोर हो उठे। मंदिर के पुजारी रूपेंद्र शुक्ला एवं रवि पंडित द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार और शंखनाद के साथ विशेष पूजा-अर्चना संपन्न कराई गई।
तिल दान और पुण्य का विशेष महत्व
मंदिर अध्यक्ष सुरेश पौधार ने बताया कि इस बार षटतिला एकादशी और मकर संक्रांति का एक साथ होना बेहद शुभ है। उन्होंने इस दिन के धार्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया:षटतिला एकादशी: इस दिन तिल का छह रूपों में प्रयोग (स्नान, उबटन, हवन, तर्पण, भोजन और दान) पापों का नाश करता है।मकर संक्रांति: सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ ही उत्तरायण का पुण्यकाल शुरू हो गया है, जिसमें दान का फल कई गुना बढ़ जाता है।
भक्ति और सेवा का संगम
मंदिर परिसर में दिन भर श्रद्धालुओं द्वारा तिल, गुड़, खिचड़ी, अन्न और वस्त्रों का दान करने का सिलसिला जारी रहा। बाबा के दर्शन के लिए उमड़ी भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रबंधन और सेवाभावी कार्यकर्ताओं ने व्यापक इंतजाम किए। कतारबद्ध व्यवस्था के कारण भक्तों ने सुगमता से दर्शन किए। पूरा वातावरण 'हारे के सहारे' के जयकारों से गुंजायमान रहा। काशीपुरी धाम में आयोजित इस उत्सव ने एक बार फिर भीलवाड़ा की धर्मपरायण संस्कृति और बाबा श्याम के प्रति अगाध श्रद्धा को प्रदर्शित किया है।
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