सुदामा और कृष्ण के मिलन को देख भावुक हुए श्रद्धालु, 'श्री कुंज' में सजी सुदामा चरित्र की सजीव झांकी
भीलवाड़ा। शहर के ग्रीन पार्क स्थित 'श्री कुंज' में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा का बुधवार को भावपूर्ण समापन हुआ। कथा के अंतिम दिन जब भगवान श्री कृष्ण और उनके अनन्य मित्र सुदामा के मिलन का प्रसंग सुनाया गया, तो पांडाल में उपस्थित हर श्रद्धालु की आंखें नम हो गईं। निंबार्क आश्रम के महंत मोहनशरण शास्त्री (वृंदावन) के सानिध्य में आयोजित इस कथा में मित्रता के अद्भुत स्वरूप के दर्शन हुए।
मित्रता के मर्म ने किया भाव-विभोर
कथा वाचक शास्त्री जी ने सुदामा चरित्र की व्याख्या करते हुए बताया कि भक्ति में धन या वैभव का कोई स्थान नहीं है, केवल शुद्ध भाव का महत्व होता है। उन्होंने वर्णन किया कि कैसे द्वारकाधीश अपने दरिद्र सखा सुदामा को देखते ही नंगे पैर दौड़ पड़े। इस प्रसंग के दौरान सुदामा चरित्र की सजीव झांकी सजाई गई, जो श्रद्धालुओं के आकर्षण का मुख्य केंद्र रही। भगवान द्वारा सुदामा के पैर धोने और गले लगाने के दृश्य ने भक्तों को भाव-विभोर कर दिया।
धूमधाम से निकली ठाकुर जी की बारात
कथा विश्राम के पश्चात शाम को गांधीनगर स्थित निंबार्क आश्रम से ठाकुर जी की भव्य बारात रवाना हुई।
गाजे-बाजे के साथ रवानगी: बारात में भक्त नाचते-गाते और विभिन्न रूप धरकर प्रस्तुतियां देते नजर आए।
पुष्प वर्षा से स्वागत: जब बारात कथा स्थल पहुंची, तो आयोजन समिति और स्थानीय क्षेत्रवासियों ने पुष्प वर्षा कर बारातियों का जोरदार स्वागत किया।
तुलसी और बड़-पीपल विवाह संपन्न
कथा स्थल पर शास्त्रीय विधान के साथ तुलसी विवाह और बड़-पीपल विवाह का आयोजन किया गया। इस धार्मिक अनुष्ठान के दौरान शिव-पार्वती विवाह की मनमोहक झांकी ने सभी का मन मोह लिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं और पुरुष श्रद्धालुओं ने भाग लेकर पुण्य लाभ कमाया।
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