बाजार में रौनक,महंगे नारियल: 19 को युग्म संयोग में रक्षाबंधन, दोपहर बाद ही बहन अपने भाई की कलाई पर बांधेगी राखी

Update: 2024-08-16 03:52 GMT

भीलवाड़ा (हलचल) इस बार रक्षाबंधन  पर भद्रा होने से बहने दोपहर बाद ही भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकेगी ,रक्षाबंधन पर्व को लेकर भीलवाड़ा के बाजार में रखियो की दुकान सज चुकी है ।

सावन शुक्ल पूर्णिमा में 19 अगस्त को श्रवण और धनिष्ठा नक्षत्र के युग्म संयोग एवं सौभाग्य व शोभन योग में रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा। भाई-बहन के प्रेम का पवित्र त्योहार रक्षाबंधन में इस वर्ष भद्रा का साया रहेगा। इस कारण  पंचांग के अनुसार दोपहर 1:25 बजे के बाद और मिथिला पंचांग के मुताबिक दोपहर 1:32 बजे के बाद ही बहन अपने भाई के कलाई पर राखी बांध सकेंगी। शास्त्रों में भद्रा रहित काल में ही राखी बांधने का प्रचलन है। इस काल में राखी बांधने से सौभाग्य में बढ़ोत्तरी होती है। वहीं शुभ योग में रक्षाबंधन का पर्व मनाने से ऐश्वर्य व सौभाग्य में वृद्धि होती है

प  अरविंद दाधीच ने बताया कि शास्त्रीय मान्यता के अनुसार सावन पूर्णिमा को अक्षत, पीला सरसों, दूब व स्वर्ण खण्ड या पीला सिक्का को रेशमी या सूती वस्त्र में बांधकर कलाई में बांधने तक वस्त्र या मौली को जोड़कर रखे। इसके बाद ऊं नमो नारायणाय व ऊं नमो भगवते वासुदेवाय इस मंत्र से राखी की रोली, अक्षत, फूल, धूप, दीप एवं प्रसाद से पूजा कर मंत्रोच्चार करते हुए बांधने से सर्वदा मंगल होता है।

भद्रा काल में शुभ कार्य वर्जित :भद्रा काल में राखी बांधना अशुभ माना जाता है। इसके अलावे अन्य कोई भी शुभ या मांगलिक कार्य भद्रा में करना वर्जित है। इससे अशुभ फल की प्राप्ति होती है। भद्रा के उग्र स्वभाव के कारण ब्रह्माजी ने इन्हें पंचांग के एक प्रमुख अंग करण में स्थान दिया। पंचांग में इनका नाम विष्टी करण रखा गया है। किसी दिन विशेष पर भद्रा करण लगने से शुभ कार्यों को करना निषेध माना गया है।

रक्षाबंधन को लेकर आजाद चौक और मुख्य बाजारों  में राखी की दुकानें सज चुकी हे। जहां विभिन्न व्रतियों में राखियां बच्चों ओर महिलाओं को  लुभा रही हे। मिठाई , नारियल और कपड़ा की भी अच्छी बिक रही हो रही हे। इस बार नारियल महंगे होने से  महिलाएं जरूरत के मुताबिक ही खरीददारी कर रह8 हैं 

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