घर का काम करना महिलाओं को नौकरानी नहीं, बल्कि 'घर की रानी' बनाता है: माहेश्वरी कपल क्लब की वैचारिक चर्चा
भीलवाड़ा। सोशल मीडिया वर्तमान दौर में विगत डेढ़ दशक से जन जागरण का बहुत सशक्त माध्यम है और बहुत सी सामाजिक कुरीतियों तथा समस्याओं का समाधान जन जागरण से ही सम्भव है। यह बात अन्तर्राष्ट्रीय माहेश्वरी कपल क्लब भारत के राष्ट्रीय महासचिव अनिता डॉ. अशोक सोडाणी ने क्लब द्वारा आयोजित राष्ट्रीय वैचारिक प्रतियोगिता में कही। इस प्रतियोगिता का मुख्य विषय "क्या महिलाओं द्वारा अपने घर में गृहस्थी के कार्य करना, उन्हें नौकरानी बना देता है..?" था। यह सवाल समाज में एक आम चर्चा का विषय है, जहाँ नई पीढ़ी की बहु-बेटियों के नौकरी करने से घरेलू कार्यों को तुलनात्मक दृष्टि से देखा जाने लगा है और घर संभालने वाली महिलाओं को कभी-कभी कमतर आँका जाता है।
क्लब के राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सुमन सुरेश सोनी ने बताया कि वर्ष 2016 से क्लब "चर्चा चाय पर" कार्यक्रम के जरिए समाज के ज्वलंत मुद्दों पर विचार एकत्रित कर रहा है। "IMCC INDIA परिवार बचाओ अभियान" के तहत इस विषय पर 133 जिला शाखाओं से 152 लोगों ने अपने सार्थक विचार रखे, जिन्हें क्लब की ओर से "प्रबुद्ध विचारक सम्मान पत्र" भेंट किया गया। क्लब के राष्ट्रीय महासचिव अनिता डॉ. अशोक सोडाणी के नेतृत्व में यह क्लब भारत सहित 7 देशों में जमीनी स्तर पर कार्यरत है। चर्चा में 107 अन्य जनों के अलावा उषा करवा, रामचन्द्र मून्दड़ा, लक्ष्मी हरिशंकर बाहेती, निधि माहेश्वरी, नर्मदा कृष्ण गोपाल काबरा, सुषमा बजाज, डॉ संगीता माहेश्वरी, विनीता प्रेम नारायण राठी, सुमन संदेश जाजू, नीलम श्याम भूतड़ा, कलावती कर्वा, सरिता मालपानी, भगवती बिहानी, मधु भूतड़ा, रंजना बिनानी, सरला बजाज, नीलम पलतानी, डॉ माया राठी, कुसुम बजाज, सुमित्रा चांडक, कविता कोठारी, आशीष चितलाँग्या, विनीता डागा, सुषमा राठी, प्रीति चितलांगिया, सुमन काबरा, प्रमोद काबरा, नीतू दरगड, उपेन्द्र माहेश्वरी, उमा मालपानी, रेणु बिड़ला, पूजा मून्दड़ा, सरिता बाहेती, दिव्या मालपानी, सीए महेश बिड़ला, श्रुति जाजू, सौरभ माहेश्वरी, मंजू हरकुट, शशि कला मंत्री, कमल किशोर झंवर, डॉ चेतना जागेटिया, रिचा माहेश्वरी, सुनीता माहेश्वरी, अशोक मून्दड़ा और सुनीता पलोड़ सहित 45 जिला पदाधिकारियों ने अपने विचार साझा किए।
चर्चा का मुख्य निष्कर्ष यह रहा कि महिलाओं द्वारा गृहस्थी का कार्य करना उन्हें नौकरानी नहीं, बल्कि उनके योगदान और समर्पण का प्रतीक बनाता है। सच्चा सम्मान तभी है जब गृहकार्य को भी बाहर कमाने जितनी ही अहमियत मिले। स्त्री जब घर में काम करती है, तो वह केवल सफाई या खाना नहीं बनाती, बल्कि रिश्तों में स्वाद घोलती है और भविष्य गढ़ती है। एक महारानी और नौकरानी में तुलना करना बेमानी है, और समय की मांग है कि नई पीढ़ी को यह समझाया जाए, ताकि परिवार रूपी संस्था को टूटने से बचाया जा सके।
भीलवाड़ा हलचल न्यूज पोर्टल पर अपनी खबर देने के लिए संपर्क करें: समाचार: प्रेम कुमार गढवाल 9413376078 (Email: bhilwarahalchal@gmail.com, व्हाट्सएप: 9829041455) विज्ञापन: विजय गढवाल 6377364129 संपर्क कार्यालय: भीलवाड़ा हलचल, कलेक्ट्री रोड, नई शाम की सब्जी मंडी, भीलवाड़ा फोन: 7737741455