वेट लॉस इंजेक्शन का बढ़ता क्रेज और सेहत पर इसके गंभीर खतरे: एक विस्तृत रिपोर्ट
आज के दौर में फिट दिखने की होड़ में लोग स्वास्थ्य के साथ बड़े जोखिम उठा रहे हैं। ओजेम्पिक, वेगोवी और मौनजारो जैसे वजन घटाने वाले इंजेक्शनों ने पूरी दुनिया में एक नई बहस छेड़ दी है। ये दवाएं, जो असल में टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों के लिए बनाई गई थीं, अब शॉर्टकट तरीके से वजन घटाने का जरिया बन गई हैं। लेकिन सवाल यह है कि जब ये 'जादुई' इंजेक्शन बंद होते हैं, तब शरीर पर क्या बीतती है?
इंजेक्शन बंद होते ही लौटने लगता है मोटापा
वैज्ञानिक शोध और क्लीनिकल ट्रायल्स के अनुसार, इन दवाओं का प्रभाव केवल तभी तक रहता है जब तक वे शरीर के सिस्टम में मौजूद हैं। जैसे ही मरीज इंजेक्शन लेना बंद करता है, मस्तिष्क को मिलने वाले 'पेट भरा होने' के संकेत रुक जाते हैं। इसके परिणामस्वरूप:
अत्यधिक भूख (Extreme Hunger): दवा बंद होते ही शरीर का प्राकृतिक हार्मोन सिस्टम फिर से सक्रिय होता है और व्यक्ति को पहले से कहीं ज्यादा भूख लगने लगती है। इसे 'हंगर रिबाउंड' कहा जाता है।
तेजी से वजन बढ़ना: अध्ययन बताते हैं कि दवा छोड़ने वाले अधिकांश लोगों का दो-तिहाई वजन महज एक साल के भीतर वापस आ गया।
मेटाबॉलिज्म में गिरावट: लंबे समय तक कृत्रिम रूप से भूख दबाने के कारण शरीर की कैलोरी बर्न करने की क्षमता (Metabolism) धीमी पड़ जाती है, जिससे भविष्य में वजन घटाना और भी मुश्किल हो जाता है।
सेहत पर अन्य दुष्प्रभाव
डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि इन इंजेक्शनों को अचानक छोड़ने से न केवल वजन वापस आता है, बल्कि ब्लड शुगर लेवल में अचानक उछाल आ सकता है। इसके अलावा, मांसपेशियों की हानि (Muscle Loss) और पाचन तंत्र से जुड़ी समस्याएं भी देखी गई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि वजन घटाने का कोई भी 'शॉर्टकट' संतुलित आहार और नियमित व्यायाम का विकल्प नहीं हो सकता।
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