सावधान: पतियों की ये 3 आदतें बढ़ा सकती हैं पत्नियों में सर्वाइकल कैंसर का खतरा
स्वास्थ्य डेस्क। कैंसर आज के समय में एक वैश्विक महामारी का रूप ले चुका है, जो हर साल लाखों परिवारों को उजाड़ रहा है। जहाँ पुरुषों में फेफड़ों और मुँह के कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं, वहीं महिलाओं में ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर एक गंभीर चुनौती बनकर उभरे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, भारत में सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाला दूसरा सबसे आम कैंसर है। चौंकाने वाली बात यह है कि विशेषज्ञों के अनुसार, पुरुषों की कुछ जीवनशैली और आदतें उनकी पत्नियों में इस घातक बीमारी के जोखिम को सीधे तौर पर बढ़ा सकती हैं।
इन 3 आदतों से बढ़ता है खतरा
1. सुरक्षा (कंडोम) का इस्तेमाल न करना:
अक्सर पुरुष कंडोम के इस्तेमाल से बचते हैं, लेकिन यह आदत जानलेवा हो सकती है। सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण HPV (ह्यूमन पेपिलोमावायरस) है। यदि पुरुष इस वायरस का वाहक है, तो बिना सुरक्षा के संबंध बनाने से यह आसानी से पार्टनर में ट्रांसफर हो जाता है। कंडोम न केवल अनचाही प्रेग्नेंसी रोकता है, बल्कि इस खतरनाक संक्रमण से भी सुरक्षा प्रदान करता है।
2. सेकंडहैंड स्मोकिंग (घर में धूम्रपान):
जो पुरुष अपनी पत्नियों या परिवार के सामने स्मोकिंग करते हैं, वे अनजाने में उन्हें कैंसर की ओर धकेल रहे हैं। सिगरेट के धुएं में 70 से अधिक कार्सिनोजेन (कैंसर पैदा करने वाले तत्व) होते हैं। सेकंडहैंड स्मोक के संपर्क में आने वाली महिलाओं का इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है, जिससे उनका शरीर HPV संक्रमण से नहीं लड़ पाता और सर्वाइकल सेल्स का DNA डैमेज होने का खतरा बढ़ जाता है।
3. पीरियड्स के दौरान असावधानी:
चिकित्सीय दृष्टि से पीरियड्स के दौरान संबंध बनाना पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं है, लेकिन इस समय सर्विक्स (गर्भाशय ग्रीवा) अत्यंत नाजुक होता है। इस दौरान संक्रमण फैलने की संभावना बहुत अधिक होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस संवेदनशीलता के कारण HPV संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है, जो भविष्य में कैंसर का आधार बन सकता है।
लक्षणों को न करें नजरअंदाज
सर्वाइकल कैंसर के शुरुआती लक्षण बहुत शांत होते हैं, लेकिन शरीर में होने वाले इन बदलावों पर ध्यान देना जरूरी है:
असामान्य ब्लीडिंग: संबंध बनाने के बाद, मेनोपॉज (मासिक धर्म बंद होने) के बाद या दो पीरियड्स के बीच में ब्लीडिंग होना।
डिस्चार्ज में बदलाव: बदबूदार पीला डिस्चार्ज या डिस्चार्ज में खून की लकीरें दिखना।
दर्द: पेट के निचले हिस्से (पेल्विक) में लगातार दर्द या संबंध बनाने के दौरान तकलीफ होना।
गंभीर लक्षण: पैरों में सूजन, थकान, वजन कम होना और पेशाब या मल में खून आना।
बचाव का मंत्र: विशेषज्ञों का कहना है कि सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए जागरूकता सबसे बड़ा हथियार है। सही समय पर Pap Smear टेस्ट और HPV वैक्सीनेशन के जरिए इस बीमारी को हराया जा सकता है। यदि किसी भी महिला में उपरोक्त लक्षण दिखें, तो बिना देरी किए डॉक्टर से परामर्श लें।
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