क्या आप जानते हैं? पेट ही है शरीर का 'दूसरा दिमाग', इन 5 हार्मोन्स के जरिए कंट्रोल करता है आपकी पूरी सेहत
अक्सर हम पेट को केवल खाना पचाने वाला अंग मानते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि पेट हमारे शरीर के 'दूसरे दिमाग' की तरह काम करता है। हमारे पेट (गट) में मौजूद करोड़ों बैक्टीरिया न केवल पाचन, बल्कि हमारी इम्युनिटी, वजन, त्वचा और यहाँ तक कि हमारे मूड को भी नियंत्रित करते हैं।
गट माइक्रोबायोम: सेहत का असली रिमोट कंट्रोल
पेट में अच्छे और बुरे बैक्टीरिया का एक संतुलन होता है, जिसे 'गट माइक्रोबायोम' कहा जाता है। यह तय करता है कि शरीर को कितनी ऊर्जा मिलेगी और कितना फैट जमा होगा। पेट और दिमाग का गहरा संबंध होता है, यही कारण है कि पेट की गड़बड़ी सीधे तनाव और चिड़चिड़ेपन को जन्म देती है।
पेट से कंट्रोल होने वाले 5 मुख्य हार्मोन
घ्रेलिन (भूख का सिग्नल): यह हार्मोन दिमाग को बताता है कि भूख लगी है। डाइटिंग के दौरान इसका स्तर बढ़ जाता है, जिससे बार-बार खाने की इच्छा होती है।
पेप्टाइड (तृप्ति का अहसास): खाना खाने के बाद यह हार्मोन दिमाग को संकेत देता है कि पेट भर चुका है। फाइबर युक्त भोजन इसे सक्रिय रखने में मदद करता है।
सेरोटोनिन (खुशी का हार्मोन): आश्चर्यजनक रूप से, इस 'हैप्पी हार्मोन' का बड़ा हिस्सा दिमाग में नहीं बल्कि पेट में बनता है। यही हमारी नींद और अच्छे मूड के लिए जिम्मेदार है।
GLP-1 (शुगर और वजन कंट्रोल): यह इंसुलिन रिलीज करने में मदद करता है, जिससे ब्लड शुगर स्थिर रहती है और भूख कम लगती है।
GIP (पोषण प्रबंधन): यह शरीर को बताता है कि पोषक तत्वों का उपयोग कैसे करना है और फैट को कैसे स्टोर करना है।
गट हेल्थ (पेट की सेहत) क्यों है जरूरी?
मजबूत इम्युनिटी: बीमारियों से लड़ने की शक्ति बढ़ती है।
चमकती त्वचा: पेट साफ रहने से स्किन पर ग्लो आता है।
वजन नियंत्रण: मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है।
बेहतर नींद व मानसिक स्वास्थ्य: तनाव कम होता है और नींद गहरी आती है।
पेट को हेल्दी रखने के 5 आसान मंत्र
फाइबर युक्त आहार: फल और हरी सब्जियां अधिक खाएं।
प्रोबायोटिक्स: दही और छाछ जैसे खाद्य पदार्थों को डाइट में शामिल करें।
प्रोसेस्ड फूड से दूरी: जंक फूड और अत्यधिक चीनी से बचें।
सक्रिय जीवनशैली: रोजाना व्यायाम करें और तनाव कम लें।
भरपूर नींद: शरीर को रिकवर होने के लिए 7-8 घंटे की नींद जरूरी है।
