जया किशोरी, जो अपनी प्रेरणादायक प्रवचनों और अपने विचारों से लोगों को जीवन की सच्चाइयों से अवगत कराती हैं. उनका एक प्रसिद्ध कथन है – “अच्छे बनो, मूर्ख नहीं”, जिसका गहरा अर्थ है. इसका यह आशय नहीं कि अच्छाई बुरी चीज है, बल्कि यह बताता है कि केवल अच्छा बनना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि बुद्धिमान और समझदार होना भी जरूरी है.
अगर व्यक्ति केवल अच्छा बनने की कोशिश करेगा लेकिन विवेकहीन होगा, तो वह अपनी और दूसरों की परेशानियों का कारण बन सकता है.
मूर्खता से हो सकता है नुकसान
कई बार लोग दूसरों की खुशी और भलाई के लिए बिना सोचे-समझे कार्य करते हैं, लेकिन यदि विवेक का उपयोग न किया जाए तो इसका परिणाम गलत भी हो सकता है. अच्छाई का यह मतलब नहीं कि व्यक्ति हर स्थिति में बिना सोचे किसी का समर्थन करे. मूर्ख व्यक्ति का साथ कई बार खुद को और दूसरों को भी मुश्किलों में डाल सकता है.
समझदारी और अच्छाई का संतुलन जरूरी
सही मायने में सफलता और शांति उन्हीं लोगों को मिलती है जो अच्छे होने के साथ-साथ बुद्धिमान भी होते हैं. हर परिस्थिति में सही निर्णय लेने और विवेक का उपयोग करने से ही व्यक्ति अपने जीवन को सकारात्मक दिशा में ले जा सकता है. जया किशोरी के इस विचार को अपनाकर हम अपने जीवन में सही संतुलन बना सकते हैं और अपने कार्यों को सार्थक बना सकते हैं.