आचार्य चाणक्य को न केवल एक महान राजनीतिज्ञ बल्कि एक दूरदर्शी शिक्षक के रूप में भी जाना जाता है। उनके द्वारा बताई गई नीतियां आज के प्रतिस्पर्धी युग में भी उतनी ही सटीक बैठती हैं। चाणक्य के अनुसार, मनुष्य की तरक्की और बर्बादी के पीछे सबसे बड़ा हाथ उसकी सोच का होता है। यदि हमारी सोच नकारात्मक हो जाए, तो वह हमें भीतर से खोखला कर देती है। आइए जानते हैं उन सोच के बारे में जो हमारी बर्बादी का कारण बन सकती हैं:
1. सब कुछ किस्मत के भरोसे छोड़ देना
जो व्यक्ति कर्म करने के बजाय केवल भाग्य के सहारे बैठा रहता है, वह कभी सफल नहीं हो सकता। चाणक्य कहते हैं कि बिना मेहनत के अच्छे परिणाम की उम्मीद करना खुद को धोखा देना है। "जो होगा देखा जाएगा" जैसी सोच इंसान को आलसी बना देती है। याद रखें, किस्मत भी उन्हीं का साथ देती है जो कठिन परिश्रम करने का साहस रखते हैं।
2. गलत आदतों को जीवन का हिस्सा बनाना
चाणक्य नीति के अनुसार, झूठ बोलना, आलस और गलत संगति जैसी आदतें इंसान की सबसे बड़ी दुश्मन होती हैं। जब कोई व्यक्ति इन बुराइयों को अपनी आदत बना लेता है, तो उसे अपना नुकसान दिखना बंद हो जाता है। ये आदतें न केवल करियर बल्कि रिश्तों और आत्मविश्वास को भी पूरी तरह खत्म कर देती हैं।
3. निरंतर अपमान सहते रहना
चुपचाप अपमान सहने वाला व्यक्ति समाज की नजरों में सबसे कमजोर होता है। चाणक्य के अनुसार, जो व्यक्ति अपने आत्मसम्मान की रक्षा नहीं कर सकता, समाज भी उसे सम्मान नहीं देता। बार-बार अपमान सहने से व्यक्ति का व्यक्तित्व अंदर से खोखला हो जाता है। जहाँ सम्मान न मिले, वहाँ खुद के हक के लिए खड़ा होना बेहद जरूरी है।
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