वैलेंटाइन वीक का 'अज्ञात पहलू': जब मोहब्बत की हवाएं लाती हैं उदासी और अकेलापन!
भीलवाड़ा। फरवरी की शुरुआत होते ही फिजाओं में प्यार का रंग घुल जाता है। लाल गुलाब, चॉकलेट और रोमांटिक संदेशों की बहार आ जाती है, लेकिन यह चमकती-दमकती तस्वीर का सिर्फ एक पहलू है। दुनिया का एक बड़ा हिस्सा ऐसा भी है, जिसके लिए वैलेंटाइन वीक प्रेम का नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक चुनौतियों का सप्ताह बन जाता है। इस दौरान अजीब सी बेचैनी, उदासी या गहरे अकेलेपन का अहसास होना कोई असामान्य बात नहीं है।
मनोचिकित्सकों के अनुसार, इस 'रोमांटिक सीजन' में अकेलापन क्यों हावी होता है, इसके कई मनोवैज्ञानिक कारण हैं:
1. सोशल मीडिया की 'परफेक्ट लाइफ' का दबाव:
सोशल मीडिया इस दौरान 'परफेक्ट कपल्स' की झांकियों से भर जाता है - महंगे तोहफे, आलीशान डिनर और खुशी से भरी पोस्ट्स। जब लोग लगातार दूसरों की "परफेक्ट लाइफ" देखते हैं, तो अनजाने में अपनी जिंदगी की तुलना उनसे करने लगते हैं। यह 'सोशल कम्पैरिजन' की प्रवृत्ति अक्सर आत्म-सम्मान में कमी और यह भावना पैदा करती है कि "मेरी ज़िंदगी उतनी अच्छी नहीं है" या "मेरे पास वो खास रिश्ता नहीं है।"
2. अकेलेपन का गहरा अहसास (सिंगल्स और ब्रेकअप के बाद):
जिन लोगों का हाल ही में ब्रेकअप हुआ है, या जो लंबे समय से सिंगल हैं, उनके लिए वैलेंटाइन वीक एक कड़वे रिमाइंडर की तरह काम करता है। समाज में वैलेंटाइन डे को इस तरह से प्रचारित किया जाता है कि जो लोग रिश्ते में नहीं हैं, उन्हें यह महसूस होने लगता है कि उनमें कोई कमी है या वे किसी खुशी से वंचित हैं। यह अकेलापन इस दौरान चरम पर पहुंच जाता है, जिससे डिप्रेशन और चिंता (एंग्जायटी) के लक्षण बढ़ सकते हैं।
3. 'परफॉरमेंस एंग्जायटी' का शिकंजा (जो रिश्तों में हैं):
चौंकाने वाली बात यह है कि जो लोग रिश्तों में हैं, उनके लिए भी यह समय हमेशा सुखद नहीं होता। टेडी डे से लेकर वैलेंटाइन डे तक, हर दिन कुछ 'खास' करने का सामाजिक दबाव 'परफॉरमेंस एंग्जायटी' पैदा करता है। "क्या मेरा पार्टनर खुश होगा?", "उसे मेरा गिफ्ट पसंद आएगा या नहीं?" जैसे सवाल प्यार की खुशी की बजाय तनाव और घबराहट को बढ़ाते हैं।
4. पुराने ज़ख्मों का हरा होना (एनीवर्सरी इफेक्ट):
'एनिवर्सरी इफेक्ट' एक मनोवैज्ञानिक स्थिति है, जहां किसी खास तारीख या मौसम के आने पर पुरानी दर्दनाक यादें और दुख ताजा हो जाते हैं। यदि किसी का पिछले साल इसी समय ब्रेकअप हुआ हो, या कोई दर्दनाक घटना घटी हो, तो फरवरी का यह हफ्ता उन पुराने भावनात्मक जख्मों को फिर से कुरेदने का काम करता है।
इस भावनात्मक दबाव' से कैसे निपटें? विशेषज्ञों के 5 महत्वपूर्ण उपाय:
डिजिटल डिटॉक्स: अगर सोशल मीडिया आपको दुखी कर रहा है, तो कुछ दिनों के लिए ऐप अनइंस्टॉल कर दें या नोटिफिकेशन बंद कर दें। अपनी स्क्रीन टाइम को सीमित करें।
सेल्फ-लव चुनें: वैलेंटाइन डे का मतलब सिर्फ दूसरों से प्यार करना नहीं है। इस दिन खुद को लाड़-प्यार करें। अपनी पसंद की किताब पढ़ें, अपनी पसंदीदा डिश बनाएं, या किसी स्पा ट्रीटमेंट का आनंद लें।
तथ्यों को पहचानें: यह केवल एक कैलेंडर की तारीख है। आपके रिश्ते की गहराई या आपकी अहमियत इस एक दिन के जश्न से तय नहीं होती। हर रिश्ता अलग होता है।
दोस्तों और परिवार के साथ समय बिताएं: प्यार के कई रूप होते हैं। अपने दोस्तों या परिवार के साथ समय बिताना आपको यह अहसास कराएगा कि आप अकेले नहीं हैं और आपके आसपास बहुत लोग हैं जो आपकी परवाह करते हैं।
किसी गतिविधि में शामिल हों: किसी हॉबी क्लास में दाखिला लें, वॉलंटियरिंग करें, या किसी नए कौशल को सीखें। यह आपके दिमाग को व्यस्त रखेगा और सकारात्मकता बढ़ाएगा।
याद रखें, वैलेंटाइन वीक प्रेम का उत्सव है, लेकिन इसे अपने ऊपर भावनात्मक बोझ न बनने दें। अपनी मानसिक शांति को प्राथमिकता दें।
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