एआई का 'हथौड़ा': राजस्थान में अवैध खनन पर खान विभाग का 'तीखा और विस्तारित' प्रहार!

Update: 2026-03-21 03:16 GMT


जयपुर। राजस्थान का खान विभाग अब अवैध खनन और परिवहन के "काले धंधे" पर न केवल "तीखा" प्रहार करेगा, बल्कि अपनी निगरानी का "विस्तार" भी करने जा रहा है। इसका हथियार है - आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक ट्रैकिंग सिस्टम। विभाग ने एक ऐसी "तीखी और विस्तारित" योजना तैयार की है, जो अवैध खनन और फर्जी रवन्ना के जरिए करोड़ों का चूना लगाने वालों की नीदें उड़ा देगी।

हर "मोड़" पर तीखी नज़र: भटकते ही बज उठेगा अलर्ट!

अवैध खनन का परिवहन अब "चोर रास्ते" से नहीं हो पाएगा। विभाग एक ऐसा सिस्टम विकसित कर रहा है, जिसके तहत खनिजों को ले जाने वाले वाहनों के लिए एक "निश्चित रूट" तय किया जाएगा। यह सिस्टम AI पर आधारित होगा और हर वाहन को पल-पल ट्रैक करेगा।

* तीखी निगरानी: यदि कोई वाहन अपने तय रूट से ज़रा भी "भटकता" है या किसी "प्रतिबंधित क्षेत्र" में प्रवेश करता है, तो सिस्टम तुरंत केंद्रीय कमांड सेंटर को लाइव अलर्ट भेजेगा।

* विस्तारित असर: यह अलर्ट केवल डेटा सेंटर तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि संबंधित क्षेत्र के अधिकारियों के मोबाइल पर भी तुरंत पहुँच जाएगा, जिससे वे त्वरित कार्रवाई कर सकें। यानी, अब कोई भी वाहन "अदृश्य" होकर अवैध परिवहन नहीं कर पाएगा।

हर "कांटे" पर AI का पहरा: 'डिजिटल रक्षक' करेगा तुलाई

अवैध खनन का एक बड़ा जरिया तुलाई कांटों पर होने वाली हेराफेरी है। विभाग इसे रोकने के लिए प्रदेश भर के करीब 2500 तुलाई कांटों को ऑटोमेटेड और AI-सक्षम बनाएगा।

* तीखी जाँच: इन कांटों पर एआई कैमरे लगे होंगे, जो केवल वाहन का वजन ही नहीं करेंगे, बल्कि ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) तकनीक के जरिए वाहन के नंबर और प्रकार की भी पहचान करेंगे।

* विस्तारित एकीकरण (Digital Integration): वजन का डेटा सीधे खान विभाग के मुख्य सर्वर पर अपलोड होगा। इसमें किसी भी तरह का मानवीय हस्तक्षेप या वजन में हेराफेरी संभव नहीं होगी। बिना सही वजन और वैध डिजिटल ई-पास के, टोल या चेक गेट का बैरियर खुलेगा ही नहीं।

'डिजिटल ई-पास' और RFID टैग: फर्जीवाड़े का 'द एंड'!

फर्जी ई-रवन्ना के जरिए विभाग को हर साल 100 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व नुकसान होता है। इस पर अंकुश लगाने के लिए, विभाग अब ओडिशा के वर्किंग मॉडल को अपना रहा है।

* तीखा वार: पुराने 'पेपर पास' की जगह अब क्यूआर कोड युक्त डिजिटल ई-पास का उपयोग होगा। अधिकारी एसएमएस या ऐप के जरिए इसे तुरंत सत्यापित कर सकेंगे।

* विस्तारित पहुँच: खदानों से जुड़े 10 हजार वाहनों को विभागीय ट्रैकिंग सिस्टम (वीटीएस) और RFID टैग से जोड़ा जाएगा। चेक पोस्ट पर लगे रीडर्स बिना गाड़ी रोके RFID टैग को स्कैन कर डेटा मिलान कर लेंगे।

विद्याधर नगर में 'डाटा सेंटर': अवैध खनन का 'वार रूम'

इस पूरी व्यवस्था का संचालन विद्याधर नगर में प्रस्तावित नए खनिज भवन में स्थापित स्टेट-ऑफ-द-आर्ट डाटा सेंटर से होगा।

* तीखी कमांड: यह डाटा सेंटर अवैध खनन के खिलाफ एक "वार रूम" की तरह काम करेगा, जहाँ से पूरे प्रदेश के वाहनों और तुलाई कांटों की लाइव मॉनिटरिंग होगी।

* विस्तारित नेटवर्क: इस डाटा सेंटर का प्रारंभिक कार्य शुरू हो चुका है और इसे लगभग एक से सवा साल में पूरी तरह सक्रिय होने का अनुमान है।

खान विभाग का यह "तीखा और विस्तारित" एआई-आधारित प्रहार न केवल अवैध खनन और परिवहन पर कड़ाई से अंकुश लगाएगा, बल्कि राज्य के राजस्व में भी महत्वपूर्ण वृद्धि सुनिश्चित करेगा। यह एक नए युग की शुरुआत है, जहाँ आधुनिक तकनीक, भ्रष्टाचार और अवैध गतिविधियों का "काल" बनेगी!

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