पंच गौरव तैराकी प्रशिक्षण शिविर के सातवें दिन तकनीकी दक्षता व समन्वय अभ्यास पर जोर

By :  vijay
Update: 2026-03-20 17:00 GMT

 

उदयपुर । राजस्थान सरकार की पंच गौरव योजना के अंतर्गत जिला प्रशासन की पहल पर ब्लॉक स्तरीय टेलेन्ट सर्च के आधार पर चयनित खिलाड़ियों के लिए आयोजित 15 दिवसीय तैराकी प्रशिक्षण शिविर के सातवें दिन खिलाड़ियों के सर्वांगीण विकास हेतु तकनीकी प्रशिक्षण एवं प्रेरक सत्रों का समन्वित आयोजन किया गया।

जिला खेल अधिकारी महेश पालीवाल ने बताया कि दिवस की शुरुआत प्रातःकालीन व्यायाम से की गई, जिसके पश्चात खिलाड़ियों को ब्रेस्ट स्ट्रोक की उन्नत तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण सत्र में ब्रेस्ट स्ट्रोक के अंतर्गत आर्म एक्शन, लेग मूवमेंट तथा ड्राइलैंड वर्कआउट पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। साथ ही पानी में आर्म एक्शन एवं किकिंग के प्रभावी समन्वय का गहन अभ्यास करवाया गया, जिससे खिलाड़ियों की गति, संतुलन एवं दक्षता में सुधार हो सके। सत्र के अंत में खिलाड़ियों की स्पीड और तकनीकी क्षमता का मूल्यांकन करने हेतु ब्रेस्ट स्ट्रोक स्प्रिंट प्रतियोगिता भी आयोजित की गई।

कार्यक्रम में विभिन्न खेल क्षेत्रों से जुड़े अनुभवी अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। अतिथि रूप में विक्रम सिंह चंदेला (तैराकी प्रशिक्षक एवं पूर्व जिला खेल अधिकारी), गजेंद्र सिंह राठौड़ (तैराकी प्रशिक्षक एवं पूर्व जिला खेल अधिकारी), शाकिर हुसैन (पूर्व जिला खेल अधिकारी), शिवदान सिंह जोलावास (राजस्थान संस्कृति, खेल एवं भाषा संघर्ष समिति), विक्रम सिंह शेखावत (चेयरमैन, बास्केटबॉल एसोसिएशन) तथा करण सिंह शेखावत (अंतरराष्ट्रीय बास्केटबॉल खिलाड़ी) उपस्थित रहे। अतिथियों ने खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए उनके खेल कौशल, अनुशासन एवं भविष्य निर्माण के विभिन्न आयामों पर मार्गदर्शन प्रदान किया। गजेंद्र सिंह राठौड़ ने तैराकी खेल की सूक्ष्म तकनीकों पर प्रकाश डालते हुए खिलाड़ियों को निरंतर अभ्यास एवं प्रतिस्पर्धात्मक अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।

विक्रम सिंह चंदेला ने अपने प्रेरक उद्बोधन में खिलाड़ियों को जीवन में लक्ष्य निर्धारित कर एक खेल में समर्पण के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया। उन्होंने बताया कि निरंतर परिश्रम, अनुशासन और दृढ़ संकल्प ही सफलता की कुंजी हैं, और खेल के माध्यम से उज्ज्वल भविष्य का निर्माण संभव है।

शिवदान सिंह जोलावास ने गुरु एवं कोच के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि एक कुशल कोच खिलाड़ी की क्षमता को पहचानकर उसे सही दिशा प्रदान करता है। उन्होंने खिलाड़ियों को अपने प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन का पूर्णतः अनुसरण करने एवं नियमित अभ्यास के माध्यम से उत्कृष्ट प्रदर्शन करने का आह्वान किया।

शिविर का सातवां दिन तकनीकी प्रशिक्षण, प्रतिस्पर्धात्मक अभ्यास एवं प्रेरणादायक संवादों के समन्वय के रूप में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जिससे खिलाड़ियों में आत्मविश्वास, कौशल एवं खेल के प्रति समर्पण की भावना और अधिक सुदृढ़ हुई।

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