बेटी ने माँ को दी मुखाग्नि, 5 साल तक की सेवा और अब निभाया 'पुत्र धर्म'

Update: 2026-01-12 15:22 GMT


​धौलपुर। सोमवार को जिला मुख्यालय स्थित चंबल मुक्तिधाम एक भावुक पल का साक्षी बना, जहाँ एक बेटी ने अपनी माँ की अंतिम इच्छा पूरी करते हुए उन्हें मुखाग्नि दी। 85 वर्षीय बुजुर्ग माँ कमला देवी के निधन के बाद उनकी छोटी बेटी रीता ने न केवल अंतिम संस्कार की रस्में निभाईं, बल्कि समाज को यह संदेश भी दिया कि बेटियाँ भी बेटों की तरह हर जिम्मेदारी निभाने में सक्षम हैं।

​विरासत के विवाद के बीच सेवा का संकल्प

​मृतका की बेटी रीता ने बताया कि उनके कोई भाई नहीं है, वे तीन बहनें (रेखा, रुक्मणी और रीता) हैं। करीब 14 साल पहले पिता के निधन के बाद परिवार के ताऊ के लड़कों ने जमीन पर कब्जा कर लिया था। ऐसे कठिन समय में रीता अपनी बुजुर्ग माँ कमला देवी को अपने ससुराल चितौरा गांव ले आई। पिछले 5 वर्षों से माँ की तबीयत बेहद खराब थी और वे चलने-फिरने में असमर्थ थीं। रीता ने ही चारपाई पर रहकर माँ की निस्वार्थ सेवा की।

​"मेरी छोटी बेटी ही करे मेरा अंतिम संस्कार"

​रीता ने भावुक होते हुए बताया कि माँ का उससे विशेष स्नेह था। माँ की अंतिम इच्छा थी कि जब वे इस दुनिया से विदा लें, तो उनकी छोटी बेटी रीता ही उनका अंतिम संस्कार करे। माँ के इसी संकल्प को पूरा करने के लिए रीता ने सोमवार को चंबल मुक्तिधाम में सनातन और वैदिक पद्धति के अनुसार चिता को मुखाग्नि दी।

​मुक्तिधाम का माहौल हुआ भावुक

​जब बेटी ने कांधा दिया और मुखाग्नि की रस्म अदा की, तो वहाँ मौजूद हर शख्स की आँखें नम हो गईं। रीता ने कहा कि वे माँ की आत्मा की शांति के लिए आगे के सभी क्रिया-कर्म भी पूरी श्रद्धा के साथ करेंगी। बेटियों द्वारा इस तरह पुत्र का धर्म निभाना क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग रीता के इस साहसी कदम की सराहना कर रहे हैं।

​"माँ की यही अंतिम ख्वाहिश थी कि मैं ही उन्हें विदा करूँ। उन्होंने मुझ पर भरोसा जताया और आज मैंने पुत्र का धर्म निभाकर उनकी आत्मा को सुकून पहुँचाने की कोशिश की है।"

— रीता, मृतका की पुत्री

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