साइबर ठगों की अब खैर नहीं: मुख्यमंत्री ने की 'साइबर क्राइम को-ऑर्डिनेशन सेंटर' की घोषणा, IG संभालेंगे कमान

By :  vijay
Update: 2026-04-05 17:22 GMT


जयपुर। राजस्थान में पैर पसारते साइबर अपराधों और डिजिटल अरेस्ट जैसे नए दौर के फ्रॉड पर लगाम लगाने के लिए राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेश में राजस्थान साइबर क्राइम को-ऑर्डिनेशन सेंटर (R4C) बनाने की महत्वपूर्ण घोषणा की है। यह सेंटर अत्याधुनिक तकनीक और त्वरित कार्रवाई के जरिए साइबर अपराधियों के नेटवर्क को ध्वस्त करने का काम करेगा।

AI और वॉइस नोट से हो रही ठगी पर लगेगी लगाम

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक्सपर्ट जयदीप दत्ता के अनुसार, वर्तमान में ठग वॉइस नोट और एआई (AI) आधारित तकनीक का सहारा लेकर लोगों को शिकार बना रहे हैं। सरकार का यह नया कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अब एक ही छत के नीचे पुलिस, बैंकिंग विशेषज्ञ और तकनीकी टीमें मौजूद रहेंगी, जिससे फ्रॉड की सूचना मिलते ही तत्काल रिस्पॉन्स संभव होगा।

तीन स्तर पर होगा वार: ट्रेस, फ्रीज और एक्शन

इस सेंटर की कार्यप्रणाली बेहद हाईटेक होगी। शिकायत मिलते ही तीन स्तरों पर ऑपरेशन शुरू होगा:

टेक्निकल टीम: ठग की लोकेशन और डिजिटल फुटप्रिंट को तुरंत ट्रेस करेगी।

बैंक अधिकारी: संबंधित खाते को ट्रैक कर उसे तत्काल फ्रीज करेंगे ताकि पीड़ित की राशि आगे ट्रांसफर न हो सके।

पुलिस टीम: संबंधित थाने के समन्वय से तुरंत FIR दर्ज कर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।

275 कार्मिकों की फौज, 24 घंटे रहेगी तैनाती

इस विशेष सेंटर की कमान आईजी (IG) रैंक के अधिकारी के पास होगी। टीम में 1 डीआईजी, 4 एसपी, 5 एएसपी, 7 डीएसपी, 8 इंस्पेक्टर और 7 तकनीकी विशेषज्ञों सहित कुल 275 कार्मिकों का अमला तैनात किया जाएगा। यह टीम 24 घंटे अलर्ट मोड पर रहेगी, जिससे साइबर ठगी के मामलों में रिकवरी की दर बढ़ने और अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजने में मदद मिलेगी।

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