अजमेर दरगाह मामला: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार
नई दिल्ली/अजमेर: अजमेर स्थित ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में शिव मंदिर होने के दावे को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई में एक नया मोड़ आया है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अजमेर की सिविल कोर्ट में चल रही सुनवाई पर तुरंत रोक लगाने की मांग को ठुकरा दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों झाड़ा पल्ला?दरवेश समुदाय (ख्वाजा साहब के अनुयायी) के सदस्यों ने सुप्रीम कोर्ट में प्रार्थना पत्र दायर कर अजमेर कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाने की गुहार लगाई थी। इस पर शीर्ष अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि:पक्षकार नहीं: याचिकाकर्ता इस मामले में सीधे तौर पर पक्षकार नहीं हैं।अधूरी याचिका: याचिकाकर्ताओं ने मूल वादियों को भी इस आवेदन में पक्षकार नहीं बनाया है।
पुराने आदेश का दिया गया था हवाला
याचिकाकर्ताओं ने दिसंबर 2024 के सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश की दुहाई दी थी, जिसमें 'प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट-1991' की संवैधानिकता पर सुनवाई के दौरान नए सर्वेक्षण (सर्वे) और लंबित मुकदमों में प्रभावी आदेश देने पर रोक लगाई गई थी। उनका तर्क था कि अजमेर कोर्ट इस आदेश की अवहेलना कर पक्षकारों को नोटिस जारी कर रहा है।
फिलहाल कोई खतरा नहीं: कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उनका पिछला आदेश सभी निचली अदालतों के लिए बाध्यकारी है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी जोड़ा कि अजमेर सिविल कोर्ट ने अभी तक कोई अंतरिम या अंतिम आदेश पारित नहीं किया है, इसलिए फिलहाल हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। इस फैसले के बाद अब अजमेर कोर्ट में इस संवेदनशील मामले की सुनवाई जारी रहेगी।