‘चित्रांजलि आर्ट कैंप’ में कलाकारों ने कैनवास पर उकेरी चित्तौड़गढ़ दुर्ग की ऐतिहासिक विरासत
चित्तौड़गढ़। जिले की गौरवशाली संस्कृति और चित्तौड़गढ़ दुर्ग के अप्रतिम सौंदर्य को कला के माध्यम से विश्व पटल पर प्रस्तुत करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन एवं पर्यटन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को ‘चित्रांजलि आर्ट कैंप’ का आयोजन किया गया। यह आयोजन ‘पंच गौरव कार्यक्रम’ के तहत ‘एक जिला एक पर्यटन स्थल’ योजना के अंतर्गत किया गया।
जिला कलक्टर आलोक रंजन ने आर्ट कैंप का अवलोकन करते हुए कलाकारों की कलाकृतियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि जिले में ‘एक जिला एक पर्यटन स्थल’ को बढ़ावा देने के लिए यह एक अभिनव पहल है, जिसमें कलाकारों ने अपनी मौलिक शैलियों के माध्यम से चित्तौड़गढ़ दुर्ग के प्रमुख पर्यटन स्थलों और ऐतिहासिक विरासत को कैनवास पर सजीव रूप में उकेरा है।
इस अवसर पर प्रशिक्षु आईएएस रविंद्र मेघवाल, उपखंड अधिकारी बीनू देवल, नगर विकास न्यास के सचिव कैलाश गुर्जर, जिला उद्योग केन्द्र के महाप्रबंधक राहुल देव सिंह, दुर्ग संरक्षण सहायक प्रेम शर्मा, सहायक वन संरक्षक (मुख्यालय) भावना शर्मा, उप निदेशक सांख्यिकी शबनम खोरवाल तथा तहसीलदार विपिन ने भी आर्ट कैंप का अवलोकन किया।
जिला पर्यटन विभाग के सहायक निदेशक विवेक जोशी ने बताया कि आयोजन का मुख्य विषय चित्तौड़गढ़ दुर्ग की ऐतिहासिक विरासत, उसका अद्वितीय स्थापत्य और मेवाड़ के स्वाभिमान का इतिहास रहा। आर्ट कैंप में भाग लेने वाले कलाकारों ने अपनी तूलिका के माध्यम से दुर्ग के गौरवशाली प्रतीकों और स्थानीय संस्कृति को सजीव रूप दिया।
उन्होंने बताया कि यह आयोजन आरटीडीसी कैफेटेरिया, फोर्ट चित्तौड़गढ़ में आयोजित किया गया। पर्यटन विभाग द्वारा चयनित कलाकारों को 2×2 फीट आकार के मानक कैनवास और एक्रेलिक रंग उपलब्ध कराए गए। निर्मित कलाकृतियां मुख्य रूप से ‘पंच गौरव’ के प्रतीकों और चित्तौड़गढ़ की ऐतिहासिक विरासत पर आधारित रही। इन कृतियों की कला प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी।
आर्ट कैंप के क्यूरेटर डॉ. मुकेश कुमार शर्मा ने बताया कि शिविर में राज्य के वरिष्ठ एवं युवा कलाकारों ने भाग लिया। कलाकार अनुराग मेहता ने महाराणा कुम्भा के कुम्भा महल का श्वेत-श्याम चित्रण किया, वहीं मनदीप शर्मा ने चित्तौड़गढ़ दुर्ग के झरोखे से शहर का दृश्य उकेरा। डॉ. निर्मल यादव ने रतन सिंह पैलेस, जबकि दुर्शित भास्कर ने मेवाड़ की कालिका माता मंदिर और मूर्तिशिल्प को अपनी कला में प्रस्तुत किया।
इसी प्रकार सुनील जांगिड़ ने विजय स्तम्भ और पूर्वी जौहर द्वार, अजय मिश्रा ने जौहर दरवाजे की भव्यता, डॉ. महेश कुमावत ने महाराणा प्रताप के साथ दुर्ग के स्थापत्य वैभव, के.जी. कदम ने गौमुख कुंड के भू-दृश्य तथा विजय कुमावत ने चारकोल माध्यम से रानी पद्मिनी महल का दृश्य उकेरा। कलाकार संत कुमार ने रानी पद्मिनी महल, विजय स्तम्भ और लोटस पॉन्ड के दृश्य को कैनवास पर साकार किया।
इस अवसर पर जिले के वरिष्ठ कलाकार प्रहलाद दास, फड़ चित्रकार दिलीप जोशी, पर्यटक सहायता केंद्र के यशवंत सिंह, प्रसिद्ध बहरूपिया कलाकार विक्रम भांड, रणवीर सिंह राणावत, अभिषेक श्रीमाल, मोनिका सोनी, प्रांजल सोनी, आरती प्रजापत, ऋषिराज सिंह, विजयराज सिंह रुद एवं ऋषिता श्रीमाल सहित अनेक कला प्रेमी उपस्थित रहे।
