साहित्यकार सनातन संस्कृति के उज्ज्वल पक्ष पर रचें साहित्य : विधायक कृपलानी

Update: 2026-01-02 12:40 GMT

निंबाहेड़ा। साहित्यकारों को सनातन धर्म और संस्कृति के उज्ज्वल पक्ष, विविधताओं में एकता तथा सामाजिक समरसता के भावों को केंद्र में रखते हुए साहित्य सृजन करना चाहिए, ताकि भारतीय समाज और राष्ट्र में सद्भाव एवं एकता को और सशक्त किया जा सके।

यह विचार पूर्व मंत्री एवं विधायक श्रीचंद कृपलानी ने साहित्यकार रतनलाल मेनारिया ‘नीर’ के उपन्यास काला सोना के विमोचन अवसर पर व्यक्त किए।

विधायक कृपलानी ने कहा कि विगत 75 वर्षों में वामपंथी विचारधारा से जुड़े कई साहित्यकारों द्वारा सनातन संस्कृति और धर्म पर निरंतर प्रहार किए गए, जिससे युवा पीढ़ी को राष्ट्र और संस्कृति के प्रति भ्रमित किया गया। वर्तमान समय में आवश्यकता है कि राष्ट्रवादी साहित्यकार अपनी लेखनी के माध्यम से समाज में सद्भाव, सामाजिक समरसता एवं समानता के आदर्शों को स्थापित करें। उन्होंने कहा कि भारतीय समाज आदिकाल से ही सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की परंपरा का संवाहक रहा है।

कार्यक्रम में पूर्व विधायक अशोक नवलखा ने साहित्यकारों का स्वागत करते हुए आह्वान किया कि वे अपने साहित्य के माध्यम से भारत को परम वैभव तक पहुंचाने की भावना का प्रसार करें और देश को पुनः विश्वगुरु के पथ पर अग्रसर करें।

इस अवसर पर अखिल भारतीय साहित्य परिषद राजस्थान के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष डॉ. रविंद्र कुमार उपाध्याय ने पूर्व मंत्री एवं विधायक चंद कृपलानी की साहित्य, समाज और संस्कृति के प्रति संवेदनशीलता की सराहना की।

कार्यक्रम में परिषद के चित्तौड़ प्रांत उपाध्यक्ष  पाल सिसोदिया, विभाग संयोजक राजेश गांधी, भाजपा जिला प्रवक्ता मानवेंद्र सिंह चौहान, निंबाहेड़ा इकाई अध्यक्ष एस.एन. जोशी, घनश्याम तोसावड़ा, बालमुकुंद प्रधान, देवीलाल मेनारिया, सत्यप्रकाश मेनारिया, मांगीलाल मेनारिया सहित अनेक शिक्षाविद् एवं साहित्यकार उपस्थित रहे।

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