राजस्थान विधानसभा में भ्रष्टाचार और टोल पर तकरार : अपनी ही सरकार पर बरसे भाजपा विधायक, कांग्रेस ने उठाए तीखे सवाल
जयपुर | राजस्थान विधानसभा का बजट सत्र गुरुवार को हंगामे की भेंट चढ़ता नजर आया। प्रश्नकाल के दौरान भ्रष्टाचार, अवैध खनन और टोल टैक्स जैसे मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। जहां विपक्ष ने जयपुर में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए, वहीं सत्ता पक्ष के विधायकों ने भी अपनी ही सरकार के अधिकारियों को कटघरे में खड़ा किया। कांग्रेस विधायक रफीक खान ने जयपुर की प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि जयपुर में भ्रष्टाचार चरम पर है और बिना रिश्वत के कोई काम नहीं हो रहा है। खान ने कहा कि नगर निगम और जेडीए द्वारा छोटे मकानों को तो सील किया जा रहा है, लेकिन रसूखदार लोगों के बड़े बंगलों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही। इस दौरान भाजपा विधायक श्रीचंद कृपलानी के साथ उनकी तीखी बहस भी हुई।
सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रदेश के स्टेट हाईवे पर निजी वाहनों को टोल फ्री नहीं किया जाएगा।
डिप्टी सीएम दीया कुमारी ने भाजपा विधायक विक्रम बंशीवाल के सवाल पर बताया कि 2018 में निजी वाहनों को टोल मुक्त करने का जो फैसला लिया गया था, उसे 2019 में वापस ले लिया गया था और वर्तमान में सरकार इसे बहाल करने का कोई विचार नहीं रखती।
हैरानी की बात तब रही जब भाजपा विधायक बहादुर सिंह कोली ने अवैध खनन को लेकर अपनी ही सरकार को घेरा। उन्होंने सीधे तौर पर वन विभाग के अधिकारियों पर खनन माफियाओं से मिलीभगत के आरोप लगाए और सख्त कार्रवाई की मांग की।
कांग्रेस विधायक दीनदयाल बैरवा ने दौसा तहसीलदार के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर सदन के 'वेल' में आकर नारेबाजी की। स्पीकर ने बैरवा के इस व्यवहार पर कड़ी नाराजगी जताते हुए उन्हें अनुशासन में रहने की हिदायत दी।
विधानसभा की इस कार्यवाही से कुछ गंभीर सवाल उभरते हैं जो लोकतांत्रिक मूल्यों की दृष्टि से विचारणीय हैं:
यदि विधायक रफीक खान के आरोप सही हैं कि केवल 'छोटे मकानों' को निशाना बनाया जा रहा है, तो यह 'समान न्याय' के सिद्धांत का उल्लंघन है। क्या सरकार इसकी निष्पक्ष जांच कराएगी या यह केवल राजनीतिक बयानबाजी बनकर रह जाएगा?
टोल फ्री करने की अधिसूचना को वापस लेना आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ है। जब जनता पहले से ही भारी रोड टैक्स और फ्यूल सेस दे रही है, तो स्टेट हाईवे पर टोल वसूली को जारी रखना कितना तर्कसंगत है?
अफसरशाही बनाम जनप्रतिनिधि : भाजपा विधायक बहादुर सिंह कोली का अपनी ही सरकार के खिलाफ बोलना यह दर्शाता है कि जमीनी स्तर पर अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय का अभाव है। क्या अधिकारी वाकई सरकार के नियंत्रण से बाहर हैं?
बजट बहस और उम्मीदें : आगामी सप्ताह में डिप्टी सीएम दीया कुमारी बजट बहस का जवाब देंगी। सदन की परंपरा रही है कि बजट के बाद भी बड़ी घोषणाएं होती हैं। अब देखना यह होगा कि क्या इन घोषणाओं में आम जनता को टोल से राहत या भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए कोई ठोस तंत्र मिलता है या नहीं।
