देशभर में 14.02 लाख आंगनवाड़ी केंद्र डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े, 8.90 करोड़ लाभार्थी पंजीकृत, राज्यसभा में मंत्रालय का जवाब
उदयपुर,। राज्यसभा सांसद चुन्नीलाल गरासिया की ओर से राज्यसभा में पूछे गए तारांकित प्रश्न के उत्तर में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने देशभर में आंगनवाड़ी केंद्रों के डिजिटलीकरण एवं मिशन पोषण 2.0 की प्रगति से संबंधित विस्तृत जानकारी सदन में प्रस्तुत की।
मंत्रालय ने बताया कि आंगनवाड़ी केंद्रों को आधुनिक डिजिटल अवसंरचना से सुसज्जित करने और पोषण निगरानी प्रणाली को मजबूत बनाने के उद्देश्य से व्यापक कार्यक्रम लागू किया जा रहा है। मिशन पोषण 2.0 के अंतर्गत आगामी पाँच वर्षों में 2 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों को “सक्षम आंगनवाड़ी” के रूप में उन्नत करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
सक्षम आंगनवाड़ी और डिजिटल सुविधाएं
सक्षम आंगनवाड़ी केंद्रों में इंटरनेट/वाई-फाई, एलईडी स्क्रीन, स्मार्ट शिक्षण उपकरण, ऑडियो-विजुअल सहायक साधन, जल शोधक तथा बाल-अनुकूल शिक्षण सामग्री जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इन उपायों का उद्देश्य बच्चों के प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा को प्रभावी बनाना तथा पोषण सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करना है।
पोषण ट्रैकर ऐप से रियल-टाइम निगरानी
मंत्रालय के अनुसार, पोषण ट्रैकर ऐप 24 भाषाओं में उपलब्ध है और इससे अब तक 14.02 लाख आंगनवाड़ी केंद्र जुड़ चुके हैं। 31 जनवरी 2026 तक इस प्लेटफॉर्म पर 8.90 करोड़ लाभार्थी पंजीकृत किए जा चुके हैं। ऐप के माध्यम से दैनिक उपस्थिति, बच्चों के विकास की निगरानी, ईसीसीई मॉड्यूल, गर्म भोजन एवं राशन वितरण का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जा रहा है। लाभार्थियों के प्रमाणीकरण के लिए फेस रिकग्निशन सिस्टम और ई-केवाईसी का उपयोग किया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो रही है।
डिजिटल उपकरणों के लिए वित्तीय सहायता
राज्यों एवं संघ राज्य क्षेत्रों को स्मार्टफोन और विकास निगरानी उपकरण जैसे स्टैडियोमीटर, शिशु वजनमापी आदि की खरीद के लिए केंद्र सरकार द्वारा वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। प्रति स्मार्टफोन 10,000 रुपये (जीएसटी सहित) तथा चार उपकरणों के एक सेट हेतु 8,000 रुपये (जीएसटी सहित) की सहायता निर्धारित की गई है।
परिणाम-आधारित मूल्यांकन में सकारात्मक निष्कर्ष
नीति आयोग के विकास निगरानी एवं मूल्यांकन कार्यालय (क्डम्व्) द्वारा वर्ष 2025 में किए गए अध्ययन में पाया गया कि पोषण ट्रैकर ने पोषण निगरानी, ईसीसीई क्रियान्वयन, लाभार्थी प्रमाणीकरण और सेवा प्रदायगी की दक्षता में बहुआयामी सुधार किया है। रिपोर्ट के अनुसार, 97.6 प्रतिशत राज्यों एवं संघ राज्य क्षेत्रों में अब डिजिटल रिकॉर्ड संधारित किए जा रहे हैं, जिससे ई-गवर्नेंस को मजबूती मिली है और साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी हुई है। डिजिटलीकरण से सेवा प्रदायगी में पारदर्शिता एवं जवाबदेही बढ़ी है। लाभार्थियों की रियल-टाइम ट्रैकिंग संभव हुई है तथा पोषण सेवाओं की सटीकता और गुणवत्ता में सुधार आया है। साथ ही समुदाय की सक्रिय भागीदारी को भी बढ़ावा मिला है और बाल विकास मानकों की बेहतर निगरानी सुनिश्चित हुई है।
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अनुसार, आंगनवाड़ी केंद्रों का डिजिटलीकरण मिशन पोषण 2.0 के तहत पोषण सेवाओं को अधिक पारदर्शी, कुशल और लाभार्थी-केंद्रित बना रहा है। यह पहल बच्चों के समग्र विकास और महिलाओं के पोषण अधिकारों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।
