किसान-मजदूर संगठनों का उदयपुर में प्रदर्शन, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन

Update: 2026-02-12 08:23 GMT

उदयपुर। देशभर के किसान और मजदूर संगठनों ने एक बार फिर केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। केंद्रीय श्रमिक संगठनों की समन्वय समिति के बैनर तले संयुक्त किसान मोर्चा और कई बड़े मजदूर संगठनों ने उदयपुर में प्रदर्शन किया। टाउन हॉल से कलेक्ट्रेट तक आक्रोश रैली निकाली गई। सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा।

प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं भी तख्तियां लेकर शामिल हुईं और महंगाई से राहत दिलाने की मांग की। संगठनों का आरोप है कि सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों का निजीकरण कर रही है, जिससे रोजगार के अवसर कम हो रहे हैं और देश की आत्मनिर्भरता पर खतरा मंडरा रहा है।

इंटक प्रदेशाध्यक्ष जगदीश राज श्रीमाली ने कहा कि रेलवे, बिजली, बैंक और बीमा जैसे क्षेत्रों में निजीकरण के कारण कर्मचारियों का भविष्य असुरक्षित हो गया है। उन्होंने बताया कि आशा सहयोगिनी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और मिड-डे मील से जुड़े कर्मचारियों को न तो उचित वेतन मिल रहा है और न ही सामाजिक सुरक्षा का लाभ दिया जा रहा है।

सीटू के हीरा लाल सालवी ने आरोप लगाया कि सरकार ठेका प्रथा को बढ़ावा देकर मजदूरों का शोषण कर रही है। वहीं किसानों में न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर नाराजगी बनी हुई है। किसान नेताओं का कहना है कि सरकार अपने लिखित वादों से पीछे हट गई है और एमएसपी की कानूनी गारंटी दी जानी चाहिए, ताकि किसान बाजार के भरोसे न रहें।

बिजली संशोधन बिल 2023 को लेकर भी विरोध तेज हो रहा है। किसानों को आशंका है कि इस कानून के लागू होने से खेती की लागत बढ़ेगी और बिजली महंगी हो जाएगी। किसान आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमों की वापसी और शहीद किसानों के परिवारों को न्याय देने की मांग भी अभी तक पूरी नहीं हुई है।

संगठनों ने भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि ऐसे समझौते पारदर्शिता के बिना किए जा रहे हैं, जिनका लाभ बड़ी विदेशी कंपनियों को मिलेगा। इससे किसानों को मिलने वाली सब्सिडी पर असर पड़ सकता है और बीजों पर उनका अधिकार कमजोर हो सकता है। संगठनों ने इसे देश की खाद्य सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया।

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