उदयपुर,। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के स्वायत्त संगठन सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र (सीसीआरटी) द्वारा लोकमाता, मालवा की महान शासिका एवं कर्मयोग की सजीव प्रतिमूर्ति माता अहिल्याबाई होलकर की 300वीं जयंती के उपलक्ष्य में महानाट्य “कर्मयोगिनी माता अहिल्या” का भव्य मंचन शाम 6 बजे रविवार को सीसीआरटी क्षेत्रीय केंद्र, हवाला खुर्द, बड़गाँव, उदयपुर, राजस्थान में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ।
राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा और मेवाड़ की गौरवशाली धरती पर आयोजित इस ऐतिहासिक प्रस्तुति ने माता अहिल्याबाई होल्कर के प्रेरणादायी जीवन, त्याग, सेवा, सुशासन और लोककल्याणकारी दृष्टि को प्रभावशाली रंगमंचीय भाषा में जीवंत कर दिया। महानाट्य में उनके बाल्यकाल से लेकर सम्पूर्ण शासनकाल तक की जीवन-यात्रा को सशक्त नाट्य रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसने दर्शकों को गहन चिंतन के लिए प्रेरित किया।
प्रस्तुति में सामाजिक समरसता, धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों के पुनर्निर्माण तथा नारी सशक्तिकरण के उनके उच्च आदर्शों को संवेदनशीलता और गरिमा के साथ मंचित किया गया। शास्त्रीय रंगमंच, लोकनृत्य, भावपूर्ण संवाद, सजीव संगीत और प्रभावशाली मंच-सज्जा के समन्वय ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इस गरिमामय अवसर पर कर्नल प्रो. एस. एस. सारंगदेवोत (कुलपति, जनार्दन राय नगर राजस्थान विद्यापीठ) मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि बी. आर. भाटी (सेवानिवृत्त ए.डी.एम., राजस्थान प्रशासनिक सेवा), प्रो. मोहन प्रकाश शर्मा, डॉ. प्रेम भंडारी, ओम प्रकाश शर्मा व दिनेश कोठारी विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
कार्यक्रम में सीसीआरटी, नई दिल्ली के माननीय अध्यक्ष डॉ. विनोद नारायण इंदुरकर की गरिमामयी उपस्थिति भी रही। उनके दूरदर्शी नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में तैयार इस महानाट्य की सभी ने मुक्त कंठ से सराहना की। साथ ही विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य अतिथि, विद्वान एवं बड़ी संख्या में कला-प्रेमी उपस्थित रहे।
मंचन में सारा शर्मा (माता अहिल्याबाई होल्कर), प्रियंका वर्मा (अहिल्याबाई का बाल्यकाल), कनक वर्मा (गौतम बाई होल्कर), आदित्य वर्मा (माले राव होल्कर), सिद्धार्थ (मल्हार राव होल्कर), पियूष गंभीर (खांडेराव होल्कर) सहित कुल 41 कलाकारों ने अपनी सशक्त अभिनय प्रतिभा से मंच को जीवंत बना दिया।
इस अवसर पर सीसीआरटी के उप-निदेशक सह कार्यक्रम समन्वयक आशुतोष, महानाट्य की लेखिका सह क्षेत्राधिकारी डॉ. जुलेशा सिद्धार्थ, क्षेत्राधिकारी अभीक सरकार, देवाराम मेघवाल, अनुज बाजपेयी एवं चंद्रमौली की गरिमामयी उपस्थिति रही। उनके समन्वयात्मक प्रयासों से उदयपुर में यह आयोजन अत्यंत सुव्यवस्थित, प्रभावशाली एवं स्मरणीय सिद्ध हुआ।
