आज के समय में हम सफर बने न बने हमदर्द बनने की जरूरत है : लूंकड़
उदयपुर । सकल जैन समाज की प्रतिनिधि संस्थान महावीर जैन परिषद के तत्वावधान में आयोजित श्रमण भगवान महावीर स्वामी के 2625वें जन्म कल्याणक महोत्सव पर आयोजित 20 दिवसीय आयोजनों की श्रृंखला में रविवार को महावीर जैन परिषद ने अपना स्वर्ण जयंती समारोह मनाते हुए स्थापना काल से रहे पांच पूर्व संयोजक व सह संयोजकों का लाइफ टाइम अचीवमेंट सम्मान से अलंकृत किया। साथ ही जैन समाज की गौरवशाली परम्परा को अक्षुण्ण रखने के उद्देश्य से उदयपुर के सभी जैन समाज परिवारों में आदर्श समाज की परिकल्पना प्रतिस्थापित हो, इस विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें ख्यातनाम मोटिवेटर डॉ. राजेन्द्र लूंकड़ ने अपना जोशीला वक्तव्य देकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
स्वर्ण जयंती कार्यक्रम का आगाज अतिथियों के दीप प्रज्ज्वलन एवं सामूहिक नमस्कार महामंत्र के जाप के साथ हुआ। समारोह में अतिथि के रूप में शहर विधायक ताराचंद जैन, मोटिवेशनल स्पीकर डॉ. राजेन्द्र लूंकड़, भारतवर्षीय 18000 दशा हुमड दिगम्बर समाज के अध्यक्ष दिनेश खोड़निया, अरिहंत ग्रुप के सुरेश गुन्देचा, सकल दिगम्बर जैन समाज के अध्यक्ष शांतिलाल वेलावत, धर्मेश नवलखा बतौर विशिष्ठ अतिथि के रूप में मौजूद रहे।
महावीर जैन परिषद के मुख्य संयोजक राजकुमार फत्तावत ने स्वागत उद्बोधन देते हुए कहा कि पिछले 50 वर्षों से उदयपुर शहर में भगवान महावीर जन्म कल्याणक को निर्विवाद रूप से मनाते हुए आज इस मुकाम पर पहुंची है । स्व. प्रो. भेरूलाल धाकड़ इस संगठन के प्रथम संयोजक बने साथ ही स्व. एडवोकेट स्व. जसवंतलाल मेहता, स्व. महावीर प्रसाद मिंडा, स्व. कालूलाल जैन व देवेंद्र छाप्या आदि ने संस्था को एक वट वृक्ष के रूप में स्थापित किया है । झीलों की नगरी उदयपुर में इन पांच व्यक्तियों की बदौलत जैन एकता की बात जहां भी आती है, पूरा संपूर्ण समाज इक_ा हो जाता है । प्रत्येक लीप ईयर में भव्य स्वामी वात्सल्य, 21 सामूहिक विवाह सहित कई सामाजिक कार्य संपन्न किए साथ ही संथारा समाधि प्रकरण, संतों एवं तीर्थों पर अत्याचार आदि विषयों पर एक जुटता दिखाई है । हम लगातार महावीर जयंती के कार्यक्रमों को प्रतिवर्ष भव्यता की ओर ले जा रहे है । इस वर्ष भगवान ऋषभदेव जयंती से भगवान महावीर जयंती तक 21 दिवसीय कार्यक्रम श्रृंखला ने निश्चित तौर पर जैन समाज को एकता के सूत्र में पिरो दिया है।
मुख्य अतिथि दिनेश खोड़निया ने अपने उद्बोधन में कहा कि 50 साल तक कोई संस्था कार्य करती है, तो यह अपने आप में गौरव की बात होती है । प्रत्येक देश का अपना एक संविधान होता है, लेकिन भगवान महावीर ने जो संदेश दिया जियो ओर जीने दो इस बात में समस्त देशों के संविधान का सार आ जाता है। खोड़निया ने समाज के लोगों से निवेदन किया कि अपने बच्चों को व्यवसायी बनाओ ना कि नौकरीपेशा वाला व्यक्ति।
- परिषद् ने 5 स्तंभ सदस्यों को किया लाइफ टाईम अचीवमेंट सम्मान से अलंकृत
महावीर जैन परिषद् द्वारा आयोजित स्वर्ण जंयती समारोह में महावीर जैन परिषद में स्थापना काल से रहे पूर्व संयोजक व सह संयोजकों का अतिथि विधायक ताराचंद जैन, दिनेश खोड़निया, शांतिलाल वेलावत, डॉ. राजेंद्र लुंकड, धर्मेश नवलखा, कुलदीप नाहर, महेंद्र तलेसरा ने परिषद ने 5 स्तंभ सदस्यों स्व. प्रो. भेरूलाल धाकड़, स्व. एडवोकेट स्व. जसवंतलाल मेहता, स्व. महावीर प्रसाद मिंडा, स्व. कालूलाल जैन को मरणोपरांत उनके परिजनों को तथा व देवेंद्र छाप्या को लाइफ टाईम अचीवमेंट सम्मान से अलंकृत किया। जिसमें मेवाड़ी पगड़ी, उपरणा व स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।
- आज के समय में हम सफर बने न बने हमदर्द बनने की जरूरत है : लूंकड़
पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष भारतीय जैन संगठना एवं मोटिवेशनल स्पीकर डॉ. राजेंद्र लुंकड ने आदर्श परिवार की परिकल्पना विषय पर अपने उद्बोधन में कहा कि आप किसी भी फाइव स्टार होटल में जाए तो आपका आधार कार्ड और आपका परिचय लिया जाता है । जिसको भी अपना परिचय समझना है, उन्हें इस चार प्रश्नों का उत्तर समझना पड़ेगा कि मैं कौन हूं, मैं कहा से आया हूं, मुझे कहां जाना है और मैं यहां क्यों आया हूं? आज से ठीक ढाई साल पहले एक दौड़ हुई, विश्व पटल पर धावक 800 मीटर की दौड़ में विजेता बनने के लिए भाग रहे थे । और वहां ऐसी घटना गठित हुई कि स्पेनिश धावक और केन्या के धावक सबसे आगे दौड़ रहे थे, वह शुरू से आगे ही थे । लेकिन जब उस दौड़ का फिनिशिंग प्वाइंट आया तो केन्या के धावक को यह नहीं पता था कि दौड़ का फिनिशिंग प्वाइंट कहां है? स्पेनिश धावक ने अपनी स्पेनिश भाषा में केन्या के धावक को कहा लेकिन केन्या का धावक उस भाषा को नहीं समझ पाया और स्पेनिश धावक ने केन्या के धावक को जोर से धक्का दिया और फिनिशिंग लाइन को टच करवा कर उसे विजेता बना दिया । चाहता तो स्पेनिश धावक जीत सकता था लेकिन उसकी केन्या के धावक के प्रति संवेदना ने इस उदाहरण को प्रस्तुत किया । चिंतन का विषय है कि भगवान महावीर के इस समाज को आज आदर्श परिवार की कल्पना पर संगोष्ठी करनी पड़ रही है । जहां संवेदना कमजोर हो जाती है, वहां किसी रिश्ते का जन्म हो ही नहीं सकता ।
लूंकड़ ने कहा कि उदयपुर में समाज के लिए सोचने वाले लोगों की तादाद है, इसलिए मुझे यह शहर पसंद है । किसी को बड़ा बनना है तो सबसे पहले छोटा बनना ही पड़ेगा । भगवान ने गर्भ में प्रण लिया कि मैं जब तक जिऊंगा तब तक माता पिता को खुद से दूर नहीं करूंगा और वो आगे चलकर तीर्थंकर का रूप लिया करते है । कानपुर में मात्र 250 परिवार के सदस्यों का गांव माधोपट्टी आज पूरे विश्व में आइएएस और आरएएस की फैक्ट्री है, प्रत्येक परिवार वहां कोई ना कोई प्रशासनिक सेवा में है । उस गांव में हर समाज के घर है, लेकिन उद्देश्य यह था कि गांव को आगे कैसे ले जाना है । पैसे से हम कितने ही समृद्ध हो जाए, लेकिन पिछले 25 सालों से हम परिवार और संवेदनाओं को लेकर कमजोर हो गए है । आज हर घर में संबंध विच्छेद तलाक जैसे केस देखने को मिल रहे है । समाज में 25 साल से ऊपर के कितने ही कुंवारे लडक़े मिल जाएंगे । परिवार छोटे हो गए, आज की परिस्थितियों को देखते हुए ऐसा लगता है आने वाले समय में गुरु भगवन्तों और साधुओं की सेवा करने वाला कोई नहीं मिलेगा । एक उदाहरण मिसाल बना मुंबई में बोहरा मुस्लिम समाज के लोगों ने सामाजिक स्तर पर निर्णय लिया कि परिवार के सभी सदस्यों की हेल्थ डायरेक्ट्री बनाना शुरू किया और उन्होंने इस हेल्थ डायरेक्ट्री के माध्यम से लगभग दो हजार लोगों को क्रिटिकल बीमारी से बचा लिया । हमें सामाजिक व्यवस्था को बिठाने की जरूरत है ना कि किसी पूजा पद्धति या श्वेतांबर दिगम्बर की मनभेद की । समाज को आदर्श बनाने की जरूरत है, परिवार स्वत: आदर्श बन जाएगा । किसी भी बात को श्रवण करना, फिर उसे ग्रहण करना तत्पश्चात उसे धारण करना और फिर उस पर अनुसरण करना, ये चार महत्वपूर्ण बिंदु होते है । पैसे वाला व्यक्ति पुण्य कमाए, ये हो ना हो लेकिन पुण्य कमाने वाला व्यक्ति अपने जीवन में पैसा अवश्य कमाता है ।
लूंकड़ ने आगे कहा कि जीवन में आगे बढऩे के लिए इन 6 बातों का याद रखना कि पेंसिल जब लिखती है तो उसके पीछे एक हाथ होता है, हर सफलता के पीछे किसी ना किसी का हाथ होता है । दूसरी बात पेंसिल जब टूट जाती है तो उसे छिलने के बाद वह और तीखी हो जाती है, उसी प्रकार जीवन में उतार चढ़ाव इस जीवन को निखारने का काम करता है । तीसरी बात लिखते समय गलती हो जाती है, हम रबड़ से मिटा देते है, इसी प्रकार जीवन में कोई गलती हो जाए तो उसे मिटा कर सुधार लो । चौथी बात पेंसिल के बाहर का शरीर सुंदर नहीं है अंदर का ग्रेफाइट इंपोर्टेंट है । पांचवीं बात पेंसिल जहां भी लिख रही है, वहां अपनी पहचान छोड़ रही है और अंत में छठी बात पेंसिल लिखते लिखते छोटी होती जाती है ठीक उसी प्रकार हमारा जीवन प्रत्येक दिन कम होता जा रहा है, इन सभी छह बातों पर विचार करने की जरूरत है ।
शब्दों द्वारा स्वागत परिषद के मुख्य संयोजक राजकुमार फत्तावत द्वारा किया गया। आभार परिषद के कोषाध्यक्ष कुलदीप नाहर द्वारा ज्ञापित किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सोनिका जैन व दीपक सिंघवी द्वारा किया गया।
इस अवसर पर राजकुमार फत्तावत, यशवंत आंचलिया, नरेन्द्र सिंघवी, विनोद भोजावत, कुलदीप नाहर, नितुल चण्डालिया, अतुल चण्डालिया, अरूण माण्डोत, लोकेश कोठारी, श्याम नागौरी, महेन्द्र तलेसरा, श्री महावीर युवा मंच संस्थान के अध्यक्ष अशोक कोठारी, महामंत्री विजयलक्ष्मी गलूंडिया, बीजेएस अध्यक्ष दीपक सिंघवी, कार्यकारी अध्यक्ष भूपेन्द्र गजावत, महामंत्री जितेन्द्र सिसोदिया, कोषाध्यक्ष वीरेन्द्र महात्मा, जेजेसी अध्यक्ष अरूण मेहता, कार्यकारी अध्यक्ष नितिन लोढ़ा, महामंत्री ललित कोठारी, बीजेएस महिला शाखा अध्यक्षा मीना कावडिय़ा, महामंत्री नीतू गजावत, श्री महावीर युवा मंच संस्थान महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्षा सोनल सिंघवी, महामंत्री प्रिया झगड़ावत, जेजेसी लेडिज विंग अध्यक्षा नीता छाजेड़, महामंत्री रचिता मोगरा सहित सैकड़ों श्रावक-श्राविकाएं आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
