रसनेन्द्रिय पर विजय पाना सबसे कठिन है : जैनाचार्य महाराज

Update: 2025-09-19 11:52 GMT

उदयपुर,। मालदास स्ट्रीट स्थित आराधना भवन में जैनाचार्य श्रीमद् विजय रत्नसेन सूरीश्वर महाराज की निश्रा में बड़े हर्षोल्लास के साथ चातुर्मासिक आराधना चल रही है।

संघ के कोषाध्यक्ष राजेश जावरिया ने बताया कि मालदास स्ट्रीट आराधना भवन में शुक्रवार को मरुधररत्न आचार्य रत्नसेनसूरी महाराज ने कहा कि दुनिया में अन्य सभी वस्तुओं पर जीत प्राप्त करना आसान है लेकिन पांच इन्द्रियों में सबसे बलवान ऐसी रसनेन्द्रिय पर विजय पाना सबसे कठिन है। कपड़े पर थोडा-सा घी लग जाता है तो कपडा चिकना हो जाता है, अथवा जमीन पर थोडा-सा घी या तेल गिर जाय तो वह जमीन भी चिकनी हो जाती है परंतु हमारी जीभ ऐसी है की आज तक इसने कितने ही घी के बने भोजन कर लिए है फिर भी यह जीभ लुखी-सुकी ही है। इस पर किसी प्रकार की चिकनाहट नहीं हुई है। पानी से भरी गिलास में थोड़ी-सी शक्कर डालने पर पानी मीठा हो जाता है परंतु आज तक इस जीभ ने हजारों किलो मिठाईया खा ली है लेकिन यह जीभ मीठी नहीं हुई है। शरीर के सभी अवयव वृद्धावस्था आने पर ढीले पड जाते है। आंखों से दिखना बंद हो जाता है। कान से सुनाई नहीं देता है। हाथ-पैर शिथिल हो जाते है। उम्र की असर सभी शारीरिक अवयवों पर होती है परंतु जीभ पर उम्र की कोई असर नहीं होती। खाने की लालसा वृद्धावस्था में भी सताती है। अच्छे-मीठे और स्वादिष्ठ भोजन से जीभ को पोषण मिलता है, परंतु शरीर और तो रोगों का घर और आत्मा पापों से मलीन बनती है। वर्तमान में जितने भी रोग है जिसमें अधिकांश रोगों का मुख्य कारण स्वाद की लोलुपता है। अत: शरीर के रोगों से मुक्त और आत्मा को पापों के मेल से बचाने के लिए तप-त्याग का आश्रय लेना चाहिए।

कोषाध्यक्ष राजेश जावरिया ने बताया कि 28 सितंबर को प्रात: 9 बजे विदाई समारोह होगा एवं 2 अक्टूबर से महावीर विद्यालय-चित्रकूट नगर में उपधान तप का शुभारंभ होगा।

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