भीलवाड़ा में भारतीय नववर्ष का शंखनाद: भव्य 'सांस्कृतिक संगम' में उमड़ा आस्था और उत्साह का सैलाब, शहर बना 'दीपावली'
भीलवाड़ा हलचल | भीलवाड़ा शहर ने कल रात भारतीय सनातन संस्कृति की अद्भुत झलक देखी। भारतीय नववर्ष महोत्सव समिति द्वारा आयोजित 'सांस्कृतिक संगम' ने अम्बेडकर चौराहा से लेकर दूधाधारी मंदिर और सांगानेरी गेट तक पूरे मार्ग को भक्ति, उल्लास और परंपरा के रंग में सराबोर कर दिया। शाम 7 बजे से रात 10 बजे तक चला यह आयोजन केवल एक मेला नहीं, बल्कि सांस्कृतिक एकता और आनंद का जीवंत संदेश था।
महाकाल की आरती और शिव बारात रही आकर्षण का केंद्र
आयोजन की शुरुआत से ही शहरवासी उत्साह से भरे नज़र आए। सरकारी दरवाजा पर आदियोगी महाकाल की भव्य आरती और दूधाधारी मंदिर में दिल्ली के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत भगवान शिव की बारात आकर्षण का मुख्य केंद्र बनी। महाकाल के जयकारों और शिव-पार्वती के अलौकिक रूप ने भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
15 स्थानों पर बिखरे कला के रंग, निहंगों के हैरतअंगेज करतब
समिति ने शहर के 15 प्रमुख स्थलों पर विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजित कीं:
* रेलवे स्टेशन चौराहा: ब्रज के कलाकारों ने आकर्षक रासलीला और फूलों की होली के साथ मन मोह लिया।
* बजरंगी चौराहा व सूचना केन्द्र: पंजाब से आए निहंग सिखों ने हैरतअंगेज अखाड़े का प्रदर्शन और शानदार प्रस्तुतियां दीं।
* गोल प्याऊ चौराहा: आदिवासी कलाकारों ने पारंपरिक गवरी नृत्य किया, जिसका वीडियो एलईडी वॉल पर भी दिखाया गया।
* गांधी बाजार व महारानी कोम्प्लेक्स: नौ देवियों की भव्य झांकियां सजाई गईं।
* भीमगंज थाना: आदर्श विद्या मंदिर के बच्चों द्वारा रामायण की भावपूर्ण प्रस्तुति दी गई।
* अन्य स्थान: पीसी ज्वैलर्स के पास राजस्थानी कार्यक्रम, सिंघल अस्पताल के पास भजन-देशभक्ति गीत, बालाजी मार्केट में कथक नृत्य, और नागौरी गार्डन में अलगोजा वादन का आयोजन हुआ।
दीपावली जैसी रोशनी और सेल्फी पॉइंट्स का क्रेज
पूरा शहर दीपावली की तरह रंग-बिरंगी रोशनी से नहाया हुआ था। कई स्थानों पर आकर्षक सेल्फी पॉइंट्स बनाए गए थे, जहाँ युवा और महिलाएं उत्साह से सेल्फी लेते नज़र आए। शहरवासियों ने न केवल कला का आनंद लिया, बल्कि फास्ट फूड स्टालों पर भी भारी भीड़ जुटी।
सनातन संस्कृति और नववर्ष का महत्व
चैत्र शुक्ल एकम को सृष्टि का प्रारंभ दिवस माना जाता है। आयोजन का उद्देश्य नववर्ष के इस धार्मिक, सामाजिक और वैज्ञानिक महत्व को उजागर करना और युवा पीढ़ी को अपनी समृद्ध सनातन संस्कृति से अवगत कराना था। शहर की सड़कों पर देर रात तक रेलमपेल लगी रही, और युवाओं, महिलाओं व बच्चों ने आयोजन का जमकर आनंद लिया।
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