एक कॉल ने रोक दिया व्यापार समझौता, अमेरिकी वाणिज्य सचिव का बड़ा बयान

Update: 2026-01-09 07:05 GMT

वाशिंगटन  डोनाल्ड ट्रंप ने जब से अमेरिकी राष्ट्रपति पद संभाला है, तब से उनकी भारत के साथ रिश्तों में तल्खी सामने आ रही है। भारत पर अमेरिकी टैरिफ का दबाव जारी है। इसी के साथ हालिया टिप्पणी में इस भार को और बढ़ाने की आशंका जताई है। भारत के साथ चल रहे ट्रंप के रिश्तों के बीच अब अमेरिका के वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर एक बड़ा और नया खुलासा किया है।

 एक फोन कॉल और अटकी रह गई ट्रेड डील

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को अभी तक अंतिम रूप न दिए जाने के कारण पर उन्होंने दावा करते हुए कहा कि व्यापार समझौता इसलिए अटका हुआ है, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बात नहीं की। उन्होंने दावे के साथ कहा कि यह प्रधानमंत्री मोदी की ओर से ट्रंप को फोन न करने के कारण यह समझौता अटका हुआ है। हॉवर्ड लटनिक ने साफ कहा कि ट्रेड डील के अटकने के पीछे की वजह कोई नीतिगत मतभेद नहीं, बल्कि पीएम मोदी का ट्रंप को सीधे फोन नहीं करना है।

अमेरिका वाणिज्य मंत्री ने क्या बताया?

ऑल-इन पॉडकास्ट में बोलते हुए अमेरिकी वाणिज्य मंत्री लटनिक ने दावा किया कि ट्रेड डील की रूपरेखा पूरी तरह से तैयार थी, लेकिन उसे अंतिम रूप देने के लिए पीएम मोदी को डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बात करनी थी। बकौल लटनिक भारत सरकार इसके लिए सहज नहीं थी और आखिरकार यह कॉल नहीं की गई, जिसके चलते व्यापार समझौता अटक गया।

व्यापार समझौते से पीछे हट चुका अमेरिका

इंटरव्यू में लटनिक ने कहा, 'चलिए साफ कर देता हूं, यह उनकी (ट्रंप) डील थी, वही अंतिम फैसला लेते हैं। वही सब कुछ करते हैं। सब कुछ पहले से तय था, इसके लिए प्रधानमंत्री मोदी को सिर्फ राष्ट्रपति ट्रंप को फोन करना था। वे ऐसा करने में असहज महसूस कर रहे थे। पीएम मोदी ने फोन नहीं किया, इसलिए सौदा नहीं हुआ।'

इसी के साथ लटनिक ने यह भी दावा करते हुए कहा कि जिन शर्तों पर भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता लगभग तय माना गया था, वे अब लागू नहीं हैं। इसी के साथ उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका अब पीछे हट चुका है, जिस पर पहले सहमति बनी थी। अब हम उस पर विचार नहीं कर रहे हैं।

500 फीसदी टैरिफ की आशंका

यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक विधेयक को मंजूरी देने के बाद आया है, जिसके तहत रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर कम से कम 500 फीसदी टैरिफ लगाया जा सकता है, जिसका उद्देश्य उन्हें 'दंडित करना' है। अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा कि यह विधेयक चीन, भारत और ब्राजील जैसे देशों के खिलाफ अमेरिका को जबरदस्त ताकत देगा, जिससे उन्हें सस्ता रूसी तेल खरीदना बंद किया जा सके।

भारत पर अब तक 50 फीसदी टैरिफ

गौरतलब है कि अगस्त, 2025 में, अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले सामानों पर अतिरिक्त शुल्क लगा दिया था, यह आरोप लगाते हुए कि नई दिल्ली द्वारा रूसी तेल की खरीद यूक्रेन में मॉस्को की 'युद्ध मशीन' को बढ़ावा दे रही है। तब से भारतीय सामानों पर कुल शुल्क 50% हो गया है, जिसमें 25% अतिरिक्त शुल्क और ट्रंप द्वारा लगाए गए 25% जवाबी शुल्क शामिल हैं। तब से दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता के कई दौर हो चुके हैं, जिनमें 10 से 12 दिसंबर तक होने वाली बैठक भी शामिल है, जब अमेरिकी अधिकारियों ने नई दिल्ली का दौरा किया था।

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