ट्रंप ईरान से युद्ध में लक्ष्य बदल रहे या नाकाम हो रहे? जानें अमेरिका की नीति और चुनौतियां

By :  vijay
Update: 2026-03-25 07:06 GMT

अमेरिका और इस्राइल की ईरान से जंग का आज 26वां दिन है। तीन हफ्तों से ज्यादा के अपने सैन्य अभियान में अब तक अमेरिका और इस्राइल ने ईरान पर ढेरों बम बरसाए हैं और उसके शीर्ष नेतृत्व, जिसमें सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई और अली लारिजानी जैसे नाम शामिल हैं, को निशाना बनाया। जवाब में ईरान ने भी इस्राइल और पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर वार किए और उसे बड़े सैन्य और आर्थिक नुकसान पहुंचाए। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भले ही ईरानी शीर्ष नेतृत्व से बातचीत की बात कहते हुए इस हफ्ते ईरान के ऊर्जा संयंत्रों को निशाना बनाने का आदेश टाल दिया हो, लेकिन पश्चिम एशिया में संघर्ष का दौर अभी भी जारी है।

ईरान के खिलाफ कैसी रही ट्रंप की नीति?

इस्राइल के साथ मिलकर ईरान पर हमला शुरू करने के बाद से ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की संघर्ष को लेकर नीति लगातार बदलती, अस्पष्ट और विरोधाभासी रही है। इसके कुछ उदाहरण भी हैं...

युद्ध की वजहों पर शुरुआत से अस्पष्ट रहे हैं ट्रंप

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि इस्राइल ईरान पर हमला करने वाला था, इसलिए अमेरिकी सेना को संभावित ईरानी जवाबी हमले से बचाने के लिए प्री-एम्पटिव स्ट्राइक की गई थी। हालांकि, ट्रंप ने इसका खंडन करते हुए कहा कि ईरान पहले हमला करने वाला था और इस वजह से शायद उन्होंने ही इस्राइल को कार्रवाई करने के लिए मजबूर किया।

ईरान के खिलाफ लक्ष्यों में बार-बार बदलाव करते रहे हैं ट्रंप

शुरुआत में ट्रंप ने ईरान में इस्लामी शासन में परिवर्तन यानी तख्तापलट का समर्थन करते हुए ईरानी जनता से अपनी सरकार को उखाड़ फेंकने का आह्वान किया, लेकिन बाद में उन्होंने अपना यह रुख नरम कर दिया।

उनके मुख्य सैन्य उद्देश्यों में ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं को पूरी तरह खत्म करना, उसकी नौसेना को तबाह करना और उसे परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना शामिल रहा है।

इसके साथ ही ट्रंप ने स्पष्ट किया कि ईरान के साथ 'बिना शर्त आत्मसमर्पण' के अलावा कोई समझौता नहीं करेंगे। हालांकि, इन सभी मकसद को पूरा कर पाने की ट्रंप की नीतियां अब तक असफल रही हैं।

होर्मुज बंद होने के बाद से बौखलाए ट्रंप

ईरान ने मार्च के शुरुआती हफ्ते से होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया। इसके बाद जब वैश्विक ऊर्जा संकट और तेल की कीमतों में भारी उछाल आया, तो ट्रंप की नीति में बौखलाहट और तेजी से बदलाव देखने को मिले।

उन्होंने पहले जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाने की कोशिश की, जिसे नाटो और यूरोपीय सहयोगियों ने ठुकरा दिया और अपने युद्धपोत भेजने में दिलचस्पी नहीं दिखाई।

इसके बाद गैस की बढ़ती कीमतों को कम करने के लिए अमेरिका ने दशकों में पहली बार कुछ रूसी और ईरानी तेल से प्रतिबंध हटा दिए। इसे खरीदने में कई देश दिलचस्पी दिखा चुके हैं।

जब इससे भी बात नहीं बनी, तो ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया कि यदि उसने यह जलमार्ग नहीं खोला, तो अमेरिका ईरान के सबसे बड़े बिजली संयंत्रों को पूरी तरह नष्ट कर देगा।

ईरान युद्ध से निकलने के लिए भी रणनीति नहीं

विशेषज्ञों और आलोचकों का मानना है कि ट्रंप ने बिना किसी स्पष्ट राजनीतिक मकसद या एग्जिट प्लान (बाहर निकलने की योजना) के यह युद्ध शुरू कर चुके हैं और अब तीन हफ्ते तक युद्ध में फंसने के बाद इसे खत्म करने के लिए योजना बना रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, युद्ध को खत्म करने की ट्रंप की नीति ईरान में रणनीतिक जीत हासिल करने के बजाय अमेरिकी घरेलू राजनीति जैसे बढ़ती तेल की कीमतों, गिरते शेयर बाजार और आगामी अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से अधिक प्रभावित है।

इस्राइल-अमेरिका के साझा हमलों के बावजूद ईरान कैसे टिका हुआ है?

शीर्ष नेतृत्व के नुकसान को सहने की क्षमता: ईरान अपने शीर्ष राजनीतिक और सैन्य नेताओं की हत्याओं का आघात झेलने में सक्षम रहा है और इसके बावजूद उसका शासन तंत्र काम कर रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि ईरानी शासन की ओर से आत्मसमर्पण करने के कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं। उनके मुताबिक, अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई को देश का नया सर्वोच्च नेता नियुक्त करने का निर्णय इस बात की ओर इशारा करता है कि तेहरान युद्ध में अपना कट्टर रुख कायम रखे हुए है। इसके पीछे मोजतबा के पिता अयातुल्ला अली खामेनेई की तैयारियों को वजह बताया जाता है, जो किसी भी सैन्य अफसर, नेता और यहां तक कि खुद के भी निधन के बाद ईरान को संभालने के लिए कई चरण की लीडरशिप तैयार कर चुके थे। यही नेतृत्व एक के बाद एक अमेरिका-इस्राइल के खिलाफ जंग को संभाले हुए है।

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ और पूर्व अमेरिकी रक्षा अधिकारी कॉलिन एच. काहल के मुताबिक, अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप का इतिहास यह सिखाता है कि बिना स्पष्ट राजनीतिक उद्देश्यों के शुरू किए गए युद्ध शायद ही कभी अच्छे नतीजे पर खत्म होते हैं। शासकों को बदलना, ईरान के व्यवहार को बदलना या उसके परमाणु कार्यक्रम को रोकना ये सभी बिल्कुल अलग लक्ष्य हैं, जिनके लिए अलग-अलग तरह के युद्ध और योजनाओं की जरूरत होती है।

लगातार जवाबी हमले: हफ्तों के हवाई हमलों के बाद भी ईरान शांत नहीं बैठा है। उसने इस्राइल और खाड़ी देशों पर बड़े पैमाने पर जवाबी हमले किए हैं। ईरान ने खाड़ी देशों में अमेरिकी संपत्तियों और ऊर्जा सुविधाओं को निशाना बनाते हुए सैकड़ों मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं। अलजजीरा से बातचीत में विश्लेषकों के एक पैनल ने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने युद्ध में जाने से पहले ईरान की ताकत और क्षमताओं पर ठीक से विचार नहीं किया। विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका ने बिना किसी स्पष्ट लक्ष्य के युद्ध शुरू कर दिया और इस बात का पूरी तरह से गलत अनुमान लगाया कि तेहरान अमेरिकी हमलों पर कैसी प्रतिक्रिया देगा। तैयारी में यह चूक उन पर भारी पड़ी है।

होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी: ईरान की सबसे प्रभावी कूटनीतिक और रणनीतिक चाल होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से बंद करने की रही है। इस रास्ते से दुनिया की 20% तेल आपूर्ति होती है। इसे बंद करने से वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें आसमान छूने लगी हैं, जिससे वैश्विक आर्थिक मंदी का खतरा पैदा हो गया है और अमेरिका पर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ गया है।

युद्धविराम से साफ इनकार: ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बघेर गालिबाफ ने स्पष्ट किया है कि ईरान युद्धविराम की तलाश में नहीं है और उनका मानना है कि हमलावर को ईरान पर दोबारा हमला करने से रोकने के लिए सबक सिखाया जाना चाहिए। सोमवार को जब ट्रंप ने अपनी उस धमकी से पलटी मारी, जिसमें उन्होंने 48 घंटे के अंदर ईरानी ऊर्जा संयंत्रों को मार गिराने की बात कही थी और दावा किया कि ईरान ने उनसे युद्धविराम के लिए संपर्क किया है तो ईरान ने युद्धविराम के लिए अमेरिका से किसी भी तरह का संपर्क करने की बात को भी खारिज कर दिया।

आक्रामक जवाबी धमकियां: जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के बिजली संयंत्रों को पूरी तरह नष्ट करने की धमकी दी, तो ईरान ने कड़ा जवाब देते हुए चेतावनी दी कि अगर उसके बिजली संयंत्रों पर हमला हुआ, तो वह इसके जवाब में पूरे पश्चिम एशिया के ऊर्जा स्थलों पर हमला करेगा और होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से बंद कर देगा। इसके बाद ट्रंप ने ईरान के खिलाफ इन हमलों को पांच दिन के लिए टालने की बात कही। 

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