हर धमकी का जवाब जंग के मैदान में देंगे: ट्रंप की चेतावनी पर ईरान के राष्ट्रपति का तीखा पलटवार

By :  vijay
Update: 2026-03-22 17:39 GMT

तेहरान|पश्चिम एशिया में जारी युद्ध अब और खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। एक तरफ ईरान ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी खतरे का जवाब सीधे युद्ध के मैदान में देगा, तो दूसरी तरफ इस्राइल ने लेबनान में अहम पुल को निशाना बनाकर संघर्ष को और तेज कर दिया है। इन घटनाओं ने पूरे क्षेत्र में तनाव को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप की चेतावनी के बाद सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि धमकियों और हमलों से ईरान और ज्यादा मजबूत और एकजुट हो रहा है। उन्होंने साफ कहा कि ईरान किसी भी पागलपन भरी धमकी का जवाब जंग के मैदान में देगा। वहीं होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर उन्होंने कहा कि यह रास्ता उन सभी के लिए खुला है जो ईरान की संप्रभुता का सम्मान करते हैं।

ट्रंप की चेतावनी और ईरान का जवाब?

दरअसल ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी थी कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह नहीं खोला गया तो अमेरिका ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमला कर सकता है। इस चेतावनी के बाद ईरान ने साफ कर दिया कि वह दबाव में आने वाला नहीं है। ईरान ने यह भी संकेत दिया कि वह अपने हितों की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।

लेबनान में इस्राइल की कार्रवाई क्यों अहम?

इसी बीच इस्राइल ने लेबनान के दक्षिणी हिस्से में कासमियेह ब्रिज को निशाना बनाया। यह पुल टायर शहर को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाला अहम रास्ता है। इस हमले के बाद आम लोगों के लिए सुरक्षित स्थानों तक पहुंचना और मुश्किल हो गया है। इस्राइल के रक्षा मंत्री ने पहले ही कहा था कि लितानी नदी के सभी पुलों को निशाना बनाया जाएगा, अगर उनका इस्तेमाल कथित आतंकी गतिविधियों में हो रहा है।

इस्राइल के इस हमले से सबसे ज्यादा असर आम नागरिकों पर पड़ा है। पुल के क्षतिग्रस्त होने से हजारों लोगों के लिए इलाके से निकलना मुश्किल हो गया है। पहले से ही युद्ध की मार झेल रहे लोग अब और ज्यादा फंसते नजर आ रहे हैं। इससे मानवीय संकट और गहरा सकता है और अंतरराष्ट्रीय चिंता भी बढ़ रही है।

ईरान के सख्त रुख और इस्राइल की लगातार सैन्य कार्रवाई से साफ है कि हालात जल्दी सामान्य होने वाले नहीं हैं। दोनों पक्षों के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में संघर्ष और तेज होने की आशंका जताई जा रही है, जिसका असर सिर्फ पश्चिम एशिया ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।

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