जनगणना में गलत जानकारी या सहयोग न करने पर होगी कानूनी कार्रवाई, जा सकते हे जेल

Update: 2026-01-04 05:11 GMT



भीलवाड़ा।

आगामी जनगणना के दौरान हर नागरिक के लिए यह अनिवार्य होगा कि वह जनगणना अधिकारियों द्वारा पूछे गए प्रश्नों का सही और पूरा उत्तर दे। जानबूझकर गलत जानकारी देने, सवालों का जवाब देने से इनकार करने या जनगणना कार्य में बाधा डालने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय ने इस संबंध में जनगणना अधिनियम 1948 और संशोधित जनगणना नियमों के तहत नई अधिसूचना जारी की है। इसी वर्ष से जनगणना का पहला चरण शुरू किया जाना प्रस्तावित है, जिसकी तैयारियां देशभर में चल रही हैं। जनगणना से जुड़े सभी नियमों और प्रक्रियाओं की जानकारी जनगणना स्टाफ को दी जाएगी और पहले चरण के लिए प्रश्नावली भी उपलब्ध कराई जाएगी। इससे जुड़ी औपचारिक अधिसूचना शीघ्र जारी होने की संभावना है।

नियमों के अनुसार जनगणना के लिए घरों के बाहर लगाए गए चिन्हों या अंकों को हटाना, मिटाना या नुकसान पहुंचाना भी अपराध की श्रेणी में आएगा। ऐसे मामलों में दोषियों पर विधिक कार्रवाई की जाएगी। वहीं यदि जनगणना स्टाफ किसी तरह की गड़बड़ी करता है, जानबूझकर गलत विवरण तैयार करता है या अनुचित प्रश्न पूछता है, तो उसके खिलाफ भी कानून के तहत कार्रवाई होगी।

महत्वपूर्ण प्रावधानों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी भी व्यक्ति को अपने परिवार की महिला सदस्य का नाम बताने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। कोई भी महिला अपने पति या दिवंगत पति का नाम बताने के लिए विवश नहीं होगी। हालांकि जिस घर, अहाते या अन्य स्थान का उपयोग किया जा रहा है, उसके उपयोगकर्ता को जनगणना अधिकारियों को प्रवेश देने और आवश्यक चिन्ह लगाने की अनुमति देनी होगी।

इसके साथ ही यह भी साफ किया गया है कि किसी भी नागरिक को जनगणना अभिलेखों के निरीक्षण का अधिकार नहीं होगा। जनगणना अधिकारी द्वारा तैयार रजिस्टर या दस्तावेज किसी के देखने के लिए उपलब्ध नहीं होंगे। जनगणना कार्यालय में जबरन प्रवेश करने पर भी दंड का प्रावधान है। यदि कोई जनगणना कर्मचारी दस्तावेजों को छिपाने, नष्ट करने या नुकसान पहुंचाने का प्रयास करता है, या ऐसा कोई कार्य करता है जिससे जनगणना परिणाम प्रभावित हो सकते हैं, तो उसे भी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

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