भीलवाड़ा: भारत गैस पर उपभोक्ताओं का भारी हंगामा, महीनों से नहीं मिल रहा सिलेंडर
भीलवाड़ा (प्रहलाद तेली): शहर के पंचवटी स्थित चामुंडा भारत गैस एजेंसी पर सोमवार को उपभोक्ताओं के सब्र का बांध टूट गया। भीषण गर्मी और गैस किल्लत से परेशान दर्जनों उपभोक्ता एजेंसी के बाहर जमा हुए और कथित कुप्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। हंगामे की सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस का जाप्ता मौके पर पहुंचा और स्थिति को संभाला।
"हमारी टंकी किसी और को बेच दी!" – उपभोक्ताओं का गंभीर आरोप
एजेंसी पहुंचे उपभोक्ताओं ने वितरण प्रणाली पर भ्रष्टाचार और अनियमितता के गंभीर आरोप लगाए हैं। अपनी पीड़ा बताते हुए उपभोक्ताओं ने कहा:
विशाल (नया हाउसिंग बोर्ड): "पिछले एक साल से मेरी टंकी किसी और को दी जा रही है। 19 तारीख से कह रहे हैं कि 'कल आएगी, कल आएगी', लेकिन आज तक नहीं आई। ये मेरी टंकी किसे दे रहे हैं, हमें कोई जानकारी नहीं दी जा रही।"
कन्हैया लाल (शास्त्री नगर): "मेरी टंकी 23 तारीख को बुक हुई थी। आज 14 दिन (कुल 45 दिन का अंतराल) हो गए हैं। नियम 25 दिन का है, लेकिन यहाँ कोई सुनने वाला नहीं है। फोन करो तो स्विच ऑफ आता है या कोई उठाता नहीं। हम काम-धंधा छोड़कर धूप में धक्के खा रहे हैं।"
ममता जीनगर (उज्ज्वला योजना लाभार्थी): "20 तारीख को बुकिंग कराई, 2 तारीख को डायरी में एंट्री कर दी लेकिन टंकी आज तक नहीं मिली। ₹300 तो मैं टैक्सी के किराए में फूंक चुकी हूँ। घर पर चूल्हा जल रहा है, क्या हम यहाँ भीख मांगने आए हैं?"
पुलिस की मौजूदगी में हुई समझाइश
हंगामा बढ़ता देख कोतवाली पुलिस ने मौके पर पहुंचकर उपभोक्ताओं को शांत करवाया। लोगों का आरोप है कि एजेंसी जानबूझकर सिलेंडरों की किल्लत पैदा कर रही है या बैकडोर से ब्लैक में सिलेंडर बेचे जा रहे हैं। उज्ज्वला योजना के गरीब लाभार्थी सबसे ज्यादा परेशान हैं, जिन्हें बार-बार चक्कर लगाने के बावजूद खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
मुख्य मुद्दे जो सामने आए:
फोन अनअवेलेबल: एजेंसी का आधिकारिक नंबर या तो बंद रहता है या कर्मचारी जवाब नहीं देते।
नियमों की धज्जियां: 25 दिन की समय सीमा के बावजूद 45-45 दिनों तक सिलेंडर का इंतजार।
आर्थिक नुकसान: गरीब उपभोक्ताओं का बार-बार एजेंसी आने-जाने में सैकड़ों रुपए का किराया बर्बाद हो रहा है।
प्रशासनिक रुख:
फिलहाल पुलिस ने उपभोक्ताओं और एजेंसी संचालक के बीच मध्यस्थता की है। उपभोक्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही वितरण व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो वे रसद विभाग (DS0) के कार्यालय का घेराव करेंगे।
