जयपुर में भीषण हादसा: बेकाबू डंपर ने 17 वाहनों को रौंदा, 14 की मौत

Update: 2025-11-03 11:17 GMT

जयपुर। राजधानी में सोमवार दोपहर हरमाड़ा क्षेत्र की लोहा मंडी रोड पर हुआ दर्दनाक सड़क हादसा पूरे प्रदेश को झकझोर गया। एक बेकाबू डंपर ने 17 से अधिक वाहनों को कुचलते हुए 13 से 14 लोगों की जान ले ली, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हैं। यह हादसा इतना भीषण था कि सड़क पर हर तरफ चीख-पुकार मच गई, कई वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए और कई लोगों के शव सड़क पर बिखरे पड़े थे।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोपहर करीब 1 बजे एक डंपर (नंबर आरजे-14 जीपी 8724) लोहा मंडी पेट्रोल पंप की ओर से रोड नंबर 14 से हाईवे की तरफ जा रहा था। इस दौरान ड्राइवर ने अचानक नियंत्रण खो दिया और तेज रफ्तार में वाहनों को रौंदना शुरू कर दिया। आसपास के लोगों ने जब तक कुछ समझा, तब तक सड़क पर हाहाकार मच गया। हादसे में कई कारें, बाइक और ऑटो रिक्शा उसकी चपेट में आ गए।


एक पेट्रोल पंप पर डंपर चालक कल्याण मीणा की एक कार चालक से बहस हुई थी। चूंकि वह शराब के नशे में था। ऐसे में कार चालक से हुई बहस के बाद उसने गुस्से में डंपर को रॉन्ग साइड में भगाया। रॉन्ग साइड में डंपर दौड़ाने के दौरान उसने एक बाइक को टक्कर मार दी। ऐसे में बाइक सवार युवा डंपर का पीछा करने लगे। पकड़े जाने के डर से उसने डंपर की स्पीड बढाई और फिर रोड कट से डंपर को सही साइड में लेकर जयपुर दिल्ली नेशनल हाईवे की और भगाने लगा। रास्ते में वह एक के बाद एक कई कारों और दुपहिया वाहनों को टक्कर मारता गया। कुछ लोग जो सड़क किनारे पैदल चल रहे थे। उन्हें भी रोंद दिया।

लगातार कई वाहनों को कुचलने के बाद भी चालक कल्याण मीणा डंपर को दौड़ाता रहा। करीब आधा किलोमीटर तक डंपर ने सड़क पर जमकर कहर बरपाया। कई वाहनों को टक्कर मारते रहने से अन्य वाहन भी आपस में टकराते रहे। आखिर में डंपर ने एक ट्रेलर को टक्कर मारी जिसके बाद वह रुक गया। अगर डंपर के सामने ट्रेलर नहीं आता तो वह और आगे दौड़ता जाता और कई और वाहनों को कुचलता जाता।

हादसे के दौरान जिसने भी इस घटनाक्रम को देखा, उसका दिल दहल गया। दुपहिया वाहनों और सड़क किनारे पैदल चलने वालों को टक्कर मारते जाने से सड़क पर लाशें बिखरती गई। डंपर कई लोगों को रौंदता हुआ आगे दौड़ता रहा। हादसे में कई लोगों के अंग टूट कर शरीर से अलग हो गए। किसी का हाथ तो किसी का पैर टूट कर अलग हो गया। कुछ वाहन तो डंपर के नीचे भी फंस गए। 10 से ज्यादा कारों को भी टक्कर मारी। हादसे में करीब 40 लोग घायल हुए। 13 लोगों की मौत हो गई जबकि एक दर्जन से ज्यादा घायल सवाई मानसिंह अस्पताल और कांवटिया अस्पताल में भर्ती हैं।

पुलिस ने बताया कि हादसे के बाद लोगों ने ड्राइवर को मौके पर पकड़ लिया। उसकी पहचान कल्याण मीणा, निवासी विराटनगर, के रूप में हुई है। मेडिकल जांच में वह नशे में पाया गया। वर्तमान में उसे पुलिस सुरक्षा में अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और एंबुलेंस टीमें मौके पर पहुंचीं। शवों को पोस्टमार्टम के लिए एसएमएस अस्पताल भेजा गया और घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। राज्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने बताया कि अब तक 13 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। दस लोग घायल हैं, जिनमें छह एसएमएस अस्पताल में, दो सीकेएस और दो कवाटिया अस्पताल में भर्ती हैं। इनमें से छह की हालत गंभीर बताई जा रही है।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया और जिला प्रशासन को निर्देश दिए कि घायलों के इलाज में कोई कमी नहीं रहे। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “जयपुर के हरमाड़ा थाना क्षेत्र में हुई सड़क दुर्घटना अत्यंत दुखद और हृदयविदारक है। घायलों के समुचित उपचार के निर्देश दिए गए हैं। ईश्वर दिवंगत आत्माओं को शांति दें और परिजनों को यह दुख सहने की शक्ति दें।”

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी हादसे पर गहरा दुख जताते हुए लिखा, “हरमाड़ा, जयपुर में हुई भीषण सड़क दुर्घटना की खबर से बेहद दुखी हूं। जिन परिवारों ने अपने प्रियजन खोए हैं, उनके प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। ईश्वर दिवंगत आत्माओं को शांति दे और घायलों को जल्द स्वस्थ करें।”

हादसे के बाद सोशल मीडिया पर साझा हुए वीडियो में घटना का भयावह दृश्य देखने को मिला। सड़क पर चारों ओर मलबा फैला हुआ है, वाहनों के परखच्चे उड़ गए हैं और लोग एक-दूसरे की मदद करते नजर आ रहे हैं। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने देर शाम तक सड़क से मलबा हटाने और यातायात सुचारू करने का काम जारी रखा।

यह हादसा न सिर्फ मानवीय त्रासदी है, बल्कि प्रशासन और ट्रैफिक प्रबंधन पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। नशे में ड्राइविंग, भारी वाहनों की फिटनेस जांच और रफ्तार नियंत्रण पर सख्त निगरानी की कमी एक बार फिर उजागर हो गई है। हरमाड़ा की यह घटना साफ बताती है कि जब तक नियमों का पालन सख्ती से नहीं होगा और दोषियों को कठोर सजा नहीं मिलेगी, तब तक सड़कें निर्दोष लोगों की जान लेती रहेंगी।

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