जीवन के साथ जुआ: कैसे ऑनलाइन गेम्स बना रहे बच्चों को जुआरी? कर्ज में दब कर लगा रहे हे मौत को गले !

Update: 2025-06-30 18:20 GMT

भीलवाड़ा हलचल जब आप शुरू शुरू में ऑनलाइन जुए से जुड़ते हैं तो पैसे कमा भी सकते हैं जो कि आपको पैसे कमाने का एक आसान तरीक़ा लगने लगता है.फिर आप इस पर और अधिक पैसे खर्च करने लगते हैं लेकिन तब आपको कुछ नहीं मिलता.कई युवा दोबारा पैसे जीतने की उम्मीद से ऑनलाइन जुए में अपने हाथ आजमाते हैं लेकिन उनमें से अधिकतर को निराशा हाथ लगती है.इससे उन्हें आर्थिक परेशानियों के साथ साथ मानसिक तनाव के दौर से भी गुज़रना पड़ता है.कुछ मामले में ऑनलाइन जुए सट्टे में हारने के बाद ब्याज मफिययो के चुंगल में फस कर भीलवाड़ा में अब तक कई लोगों ने आत्महत्या तक कर ली.


 




 

 


ऐसे होती है ठगी

2023 से 2025 तक महादेव बेटिंग एप जैसे कई अन्य गेमिंग एप से जुडकऱ युवा जुआ-सट्टेबाजी की लत के शिकार हो रहे हैं। कई तो साइबर ठगी के जाल में फंसकर अपनी जमा पूंजी गवां चुके हैं।

गेमिंग एप डाउनलोड करते ही यूजर से नाम, मोबाइल नंबर, आधार कार्ड और बैंक डिटेल्स मांगी जाती है और पैसे कमाने की लालच दिया जाता है। कुछ दिनों के बाद गेमिंग के जरिए ठग उन्हें फर्जी लिंक भेजते हैं, जिन पर क्लिक करते ही फोन में वायरस और माल वेयर इंस्टॉल हो जाता है। हैक होते ही खाता खाली हो जाता है।

फिर शुरु होता है ब्लैकमेलिंग का खेल

क्रेडिट कार्ड और डेबिड कार्ड को हैक कर या फिर इनकी क्लोनिंग करके खाताधारकों को ब्लैकमेल किया जाता है।   कई मामले ऐसे आए हैं, जिनमें खाते से राशि गायब हो गई है।

 

बदनामी के डर से नहीं करते शिकायत

  पुलिस का कहना है कि गेमिंग एप में अक्सर बड़े घरों के युवा फंस रहे हैं। वे अपने मां-बाप का वालेट चुराकर क्रेडिट या डेबिड कार्ड से राशि का भुगतान कर देते हैं। बदनामी से बचने के लिए कई बार मां-बाप इसकी शिकायत नहीं करते। इसलिए पुलिस ने आगाह किया है, बच्चों की गतिविधियों पर अभिभावक नजर रखें।

साइबर ठगी की शिकायतों पर साइबर टीम तत्काल कार्रवाई करती है। साइबर सेल की मदद से लोकेशन का पता लगाया जाता है।   महादेव बेटिंग एप से जुड़े मामलों में ईडी ने कार्रवाई की है। जिले स्तर पर ट्रेंडिंग और अन्य एप से साइबर ठगी से जुड़े मामलों में निगरानी रखी जा रही है। साइबर अपराध रोकने के लिए लोगों को भी जागरूक होना जरूरी है।

ऑनलाइन जुए की लत

जब किसी इंटरनेट लिंक, वेबसाइट या मोबाइल ऐप के ज़रिए पैसे दांव पर लगाए जाते हैं तो इसे ऑनलाइन गैम्बलिंग या ऑनलाइन जुआ कहते हैं.इसमें पोकर, ब्लैकजैक, स्लॉट मशीन और कई अन्य तरह की सट्टेबाज़ी शामिल हैं.जब कोई ऑनलाइन जुआ खेलता है तो आपके सामने एक कंप्यूटर प्रोग्राम या एक व्यक्ति हो सकता है.नए यूज़र्स को ऑनलाइन जुए की ओर आकर्षित करने के लिए शुरू शुरू में उन्हें मुफ़्त गेम खेलने की पेशकश की जाती है और सोशल मीडिया के ज़रिए उन्हें टारगेट किया जाता है.ऐप को इस तरह से डिज़ाइन किया जाता है कि जुआ खेलने वाले लंबे समय तक खेलते रहें. वो खेल के दौरान इससे पूरी तरह चिपके रहते हैं.जब फ़्री क्रेडिट ख़त्म हो जाते हैं तब इसमें अपने पैसे लगाने पड़ते हैं. जब आप पहली बार ये जुआ खेलते हैं तो इसके बाद आपको इससे जुड़े विज्ञापन मिलने लगते हैं जो आपको वापस गेमिंग वेबसाइट पर आने के लिए आकर्षित करते हैं.

ऑनलाइन जुए की लत का ज़िंदगी पर असर

कई लोग सिर्फ़ अपने मनोरंजन के लिए ऑनलाइन जुआ खेलना शुरू करते हैं, लेकिन जल्द ही उन्हें इसकी लत लग जाती है.धीरे धीरे इसका असर उनकी ज़िंदगी पर पड़ने लगता है और कुछ लोगों पर इसका प्रतिकूल असर इतना होता है कि वो कंगाल तक हो जाते हैं.

वे न केवल अपनी जमा पूंजी खोते हैं बल्कि अपना पूरा जीवन भी गंवा देते हैं क्योंकि कइयों ने इससे परेशान हो कर अपनी ज़िंदगी ही ख़त्म कर दी है.दूसरी तरफ़, एक शोध के मुताबिक, जैसे जैसे लोगों के लिए मोबाइल फ़ोन रखना आसान हो रहा है वैसे ही वो इंटरनेट का भी बहुत तेज़ी से इस्तेमाल कर रहे हैं.जो लोग ऑनलाइन जुए में लगे हैं वो इसकी जानकारी बग़ैर किसी को दिए ऐसा कर रहे होते हैं. ख़ास कर जब इसका ख़राब असर उन पर पड़ता है तब वो इसे किसी अन्य व्यक्ति से साझा तक नहीं करते.



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