बड़ा खेला: बागोर और मांडल थाना क्षेत्रों में कोठारी नदी से जमकर हो रहा है र बजरी दोहन, कई लगे है रेत के ढेर

Update: 2025-08-14 01:30 GMT
बागोर और मांडल थाना क्षेत्रों में कोठारी नदी से जमकर हो रहा है र बजरी दोहन, कई लगे है रेत के ढेर
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भीलवाड़ा/बागोर (हलचल)। जिले के बागोर और मांडल थाना क्षेत्रों में कोठारी नदी से अवैध बजरी दोहन का खेल बदस्तूर जारी है। दिन ढलते ही जैसे ही अंधेरा गहराता है, वैसे ही नदी के किनारे मशीनों की गर्जना शुरू हो जाती है। रात के सन्नाटे में जब आम नागरिक गहरी नींद में होते हैं, उस वक्त बजरी माफिया नदी की कोख से रेत निकालकर पास के इलाकों में बड़े-बड़े ढेरों में जमा कर देते हैं।

इन रेत के ढेरों को बाद में सुबह-सुबह डम्पर और ट्रैक्टरों के जरिए निर्माण स्थलों तक पहुंचा दिया जाता है। आश्चर्य की बात यह है कि यह पूरा खेल प्रशासन और पुलिस की आंखों के सामने चल रहा है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति ही होती नजर आ रही है।

 महासतिया बना अवैध खनन का हब

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, बागोर कस्बे के महासतिया क्षेत्र में कोठारी नदी से बड़े पैमाने पर रेत निकाली जा रही है। यह रेत अमरगढ़ मार्ग पर एक सुरक्षित स्थान पर इकट्ठा की जाती है, जहां से आगे ट्रकों और ट्रैक्टरों द्वारा सप्लाई की जाती है।

अमरगढ़, घोड़ास और पीथास क्षेत्र में भी ऐसे ही हालात हैं। यहां भी रात के अंधेरे में मशीने बिना रोक-टोक गरजती हैं और बजरी का दोहन बेरोकटोक जारी रहता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की मिलीभगत के बिना यह अवैध कारोबार संभव नहीं है। हालांकि जिम्मेदार अधिकारी और पुलिस यह कहकर पल्ला झाड़ते हैं कि "क्षेत्र में कोई अवैध खनन नहीं हो रहा।" मगर हकीकत कुछ और ही बयां करती है।

मांडल क्षेत्र भी अछूता नहीं

मांडल थाना क्षेत्र के आरजिया, मालीखेड़ा और आसपास के गांवों में भी कोठारी नदी से अवैध बजरी दोहन खुलेआम किया जा रहा है। यहां तक कि कई सफेदपोश नेताओं और उनके कारिंदों पर इस अवैध खनन में संलिप्त होने के आरोप लगते रहे हैं।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि कई बार उन्होंने इस अवैध गतिविधि की शिकायत की, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उलटे शिकायत करने वालों को ही डराने-धमकाने का प्रयास किया गया।

 खनिज विभाग की टीम पर हुआ हमला

कुछ समय पहले जब खनिज विभाग की टीम और मांडल के कुछ अधिकारियों ने मिलकर अवैध बजरी दोहन पर रोक लगाने की कोशिश की, तो उन पर माफियाओं ने हमला बोल दिया। उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई और गाड़ियों को नुकसान पहुंचाया गया।

इस घटना की रिपोर्ट मांडल थाने में दर्ज भी हुई, लेकिन आज तक किसी प्रभावशाली माफिया पर कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हो सकी। इससे माफियाओं के हौंसले इतने बुलंद हैं कि अब वे खुलेआम अपनी गतिविधियां चला रहे हैं।

 पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर सवाल

रोजाना रात में बजरी का दोहन और सुबह-सुबह रेत के ढेर पुलिस व प्रशासन की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा करते हैं।

पुलिस गश्त के नाम पर खानापूर्ति करती है, लेकिन असल में जिन घंटों में अवैध खनन होता है, उन घंटों में गश्त नदारद रहती है। ऐसा प्रतीत होता है जैसे माफियाओं के सोने-जागने के शेड्यूल के अनुसार ही गश्त की जाती हो।

 जनप्रतिनिधियों पर संरक्षण के आरोप

स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि कुछ जनप्रतिनिधि खुद इन माफियाओं को संरक्षण दे रहे हैं। इसके चलते प्रशासन भी इनके खिलाफ सख्त कदम उठाने से कतराता है।

इस तरह की मिलीभगत से न केवल सरकारी खजाने को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि कोठारी नदी का पारिस्थितिकी तंत्र भी बर्बाद हो रहा है। रेत निकालने से नदी की गहराई बढ़ रही है, जिससे बारिश के दिनों में आसपास के गांवों में बाढ़ का खतरा भी बढ़ गया है।

 कहते हैं पर्यावरणविद्?

पर्यावरणविदों का कहना है कि इस तरह का अंधाधुंध बजरी दोहन नदियों के अस्तित्व को ही खतरे में डाल रहा है। नदी की जैव विविधता पर असर पड़ रहा है, जल स्तर नीचे जा रहा है और भूमि कटाव की समस्या बढ़ रही है।

यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो भविष्य में इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

मांग उठी जांच और कार्रवाई की

स्थानीय ग्रामीणों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पर्यावरण संगठनों ने जिला प्रशासन से इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

खनिज विभाग को चाहिए कि वह रात के समय विशेष गश्त दल गठित करे और पुलिस को भी सतर्कता बढ़ाने के निर्देश दिए जाएं। साथ ही, जिन क्षेत्रों में रेत के ढेर लगे हैं, वहां छापेमारी कर दोषियों को नामजद कर कड़ी कार्रवाई की जाए।

कोठारी नदी से रात के अंधेरे में हो रहा बजरी दोहन एक गंभीर मुद्दा बन चुका है। यह न सिर्फ कानून व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि पर्यावरण और ग्रामीणों के जीवन पर भी इसका सीधा असर पड़ रहा है। यदि जल्द ही इस पर सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में इसके परिणाम और भी भयावह होंगे।

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