21 साल बाद खुला रहस्य: मजदूरी के नाम पर लापता सांवरिया आखिरकार पुलिस को मिला, होटल पर कर रहा था काम
भीलवाड़ा | प्रेमकुमार गढ़वाल। करीब 21 वर्षों तक गुमनामी और अंधेरे में जिंदगी गुजारने वाला सांवरिया माली आखिरकार पुलिस को मिल ही गया। मजदूरी के बहाने भीलवाड़ा से गुजरात ले जाए गए युवक को प्रताप नगर थाना पुलिस ने आरोली क्षेत्र के एक होटल से दस्तयाब किया। हैरानी की बात यह रही कि युवक महज 5 दिन पहले ही गुजरात से लौटकर भीलवाड़ा आया था, और तभी पुलिस की मेहनत रंग ले आई।
मजदूरी का झांसा, फिर बना बंधक!
परिजनों के अनुसार, सांवरिया माली को आइसक्रीम की लारी पर काम दिलाने का लालच देकर गुजरात के भुज क्षेत्र में ले जाया गया, लेकिन उसके बाद वह कभी घर नहीं लौटा। आरोप है कि युवक को बंधक बनाकर रखा गया, और परिवार से उसका संपर्क पूरी तरह काट दिया गया।
वर्ष 2008 में दर्ज हुआ था मामला
जिले के पंडेर थाना क्षेत्र निवासी रतनलाल माली पुत्र धन्नालाल माली ने वर्ष 2008 में न्यायालय में इस्तगासा पेश कर आरोप लगाया था कि समेलिया (मेजा) निवासी लादूलाल शर्मा, तथा लाखोला (गंगापुर) निवासी श्याम पारिक, सांवरिया को गुजरात के भुज क्षेत्र में मजदूरी के लिए ले गए थे, लेकिन वापस नहीं भेजा।
इस पर प्रताप नगर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की, मगर वर्षों तक युवक का कोई सुराग नहीं मिल पाया।
21 साल तक अंधेरे में सच
पुलिस, प्रशासन और सिस्टम की तमाम कोशिशों के बावजूद सांवरिया माली का कोई पता नहीं चला। समय बीतता गया, फाइलें धूल फांकती रहीं और एक परिवार अपने बेटे की आस में टूटता चला गया।
आधार कार्ड बना सुराग, खुली गुत्थी
मामले की दोबारा जांच कर रहे सहायक उप निरीक्षक चिराग कायमखानी और कांस्टेबल राजेंद्र गाडरी ने केस की तह तक जाने का फैसला किया।
जांच के दौरान पुलिस को सांवरिया का आधार नंबर मिला। इस आधार पर जारी मोबाइल सिम चालू होने की जानकारी सामने आई। जब कॉल डिटेल और लोकेशन ट्रेस की गई तो मोबाइल की लोकेशन भीलवाड़ा जिले के आरोली क्षेत्र में मिली।
आरोली में ढाबे से हुआ दस्तयाब
03 फरवरी 2026 को पुलिस टीम आरोली के पास स्थित जोगणिया भोजनालय (ढाबा) पहुंची, जहां 21 साल से लापता सांवरिया माली होटल पर मजदूरी करता मिला। पुलिस ने उसे सुरक्षित दस्तयाब कर लिया। 21 वर्षों बाद बेटे के सकुशल मिलने की खबर जैसे ही परिवार तक पहुंची, घर में भावुक माहौल बन गया, आंखें नम हो गईं।
भुज से मुंबई-सूरत तक भटका जीवन
पुलिस पूछताछ में सांवरिया माली ने बताया कि वह गुजरात के भुज से लापता हुआ,इसके बाद गांधीधाम, वापी, मुंबई और सूरत जैसे शहरों में भटका,फैक्ट्रियों, कैटरिंग, होटल और अन्य स्थानों पर मजदूरी कर किसी तरह जीवन यापन करता रहा।करीब 5 दिन पहले ही वह सूरत से भीलवाड़ा लौटा था, जहां से पुलिस ने उसे ढूंढ निकाला।
बेटे की राह देखते-देखते पिता ने तोड़ दिया दम
सांवरिया माली वर्ष 2005 में लापता हुआ था। बेटे की तलाश में दर-दर भटके रतनलाल माली ने 2008 में मामला दर्ज कराया, लेकिन लंबी कानूनी प्रक्रिया और निराशा के बीच
वर्ष 2015 में उनकी मृत्यु हो गई।
दुर्भाग्यवश, पिता अपने बेटे को वापस देखने का सपना पूरा होते नहीं देख सके।
21 साल बाद इंसाफ की एक किरण
हालांकि यह कहानी देर से सही, लेकिन सिस्टम की मेहनत से एक गुमशुदा जिंदगी वापस मिली। अब आगे की कानूनी प्रक्रिया और पुराने आरोपों की सच्चाई की जांच की जाएगी।
