​मनरेगा के नाम पर मचे 'सियासी घमासान' के बीच राजस्थान ने रचा इतिहास:: महिलाओं को रोजगार देने में उत्तर भारत में अव्वल, भीलवाड़ा में 74.5% भागीदारी

Update: 2026-01-14 05:52 GMT


​भीलवाड़ा हलचल। राजस्थान में इन दिनों महात्मा गांधी नरेगा (मनरेगा) योजना के नाम को बदलकर 'वीबी जी राम जी' करने के प्रस्ताव को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक जंग छिड़ी हुई है। जहां कांग्रेस इसे रोजगार छीनने की साजिश बताकर विरोध प्रदर्शन कर रही है, वहीं भाजपा का दावा है कि योजना के तहत रोजगार के दिन 100 से बढ़ाकर 125 किए जा रहे हैं।

​लेकिन इस सियासी शोर के बीच एक सुखद तस्वीर सामने आई है। केंद्र सरकार की ताजा 'स्टेट परफार्मेंस रिपोर्ट' के अनुसार, राजस्थान मनरेगा के तहत महिलाओं को रोजगार देने में उत्तर भारत में पहले स्थान पर पहुंच गया है।

​भीलवाड़ा और प्रदेश के चौंकाने वाले आंकड़े:

​रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं की भागीदारी का औसत जहां 58% है, वहीं राजस्थान में यह आंकड़ा 70% के पार है।

​भीलवाड़ा का प्रदर्शन: वस्त्रनगरी भीलवाड़ा में 74.5% महिलाओं को रोजगार मिला है।

​डूंगरपुर रहा नंबर-1: आदिवासी बहुल जिला डूंगरपुर 81.6% के साथ पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान पर रहा है।

​राजसमंद और बांसवाड़ा: राजसमंद 78.9% के साथ दूसरे और बांसवाड़ा 77.4% के साथ तीसरे स्थान पर है।

​अन्य जिले: प्रतापगढ़ में 75.2%, उदयपुर में 73.1% और चित्तौड़गढ़ में 71.8% महिला भागीदारी रही।

​महिलाओं के नाम रहा 14 करोड़ मानव दिवस का काम:

​वर्ष 2024-25 में प्रदेश में कुल 31.66 करोड़ मानव दिवस सृजित हुए थे। ताजा आंकड़ों के अनुसार, 2025 में अब तक सृजित 21 करोड़ मानव दिवस में से 14 करोड़ से अधिक अकेले महिलाओं के नाम हैं। खास बात यह है कि पश्चिमी राजस्थान के जिलों (जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर) में भी यह भागीदारी राष्ट्रीय औसत से अधिक रही है।

​महिला मेट और जातिगत भागीदारी:

​मनरेगा कार्यस्थलों पर केवल श्रमिक ही नहीं, बल्कि 'मेट' के रूप में भी महिलाओं को प्राथमिकता दी गई है। कई जिलों में 50% से 70% तक महिला मेट कार्यरत हैं। भागीदारी के मामले में अनुसूचित जनजाति (24%) और अनुसूचित जाति (21%) की महिलाएं सबसे आगे रही हैं।

​आजीविका मिशन से भी जुड़ी महिलाएं:

​सिर्फ मनरेगा ही नहीं, बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी महिलाओं को सशक्त बनाया जा रहा है:

​कृषि सखी: प्रदेश में 9.34 लाख महिला किसानों को उन्नत कृषि पद्धतियों से जोड़ा गया है।

​पशु सखी: लगभग 9.28 लाख महिलाओं को पशुपालन के माध्यम से अतिरिक्त आमदनी के लिए प्रशिक्षित किया गया है।

​निष्कर्ष: पुरुषों के रोजगार के लिए पलायन करने के बावजूद, महिलाओं ने स्थानीय स्तर पर मोर्चा संभालकर न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संभाला है, बल्कि राजस्थान को देश में एक मिसाल के रूप में पेश किया है।


​विकास और राजनीति की हर सटीक खबर के लिए देखते रहें 'भीलवाड़ा हलचल'।

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