सवाईपुर में बजरी खनन परियोजना को लेकर जनसुनवाई, ग्रामीणों ने जताई कड़ी आपत्ति
सवाईपुर (सांवर वैष्णव) । सवाईपुर ग्राम पंचायत मुख्यालय परिसर में बुधवार को एक दिवसीय जनसुनवाई शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने प्रस्तावित बस्ती खनन परियोजना पर ग्रामीणों से आपत्तियां आमंत्रित कीं। यह परियोजना प्लाट संख्या बज-03 पर प्रस्तावित है, जिसका कुल क्षेत्रफल 99.9996 हेक्टेयर है, जबकि कुल क्लस्टर क्षेत्रफल 372.3939 हेक्टेयर बताया गया है। खनन क्षेत्र करेड (खसरा संख्या 378), भाकलिया (1131), तथा सोपुरा (273) के बनास नदी क्षेत्र में स्थित है।
सूचना के अभाव में ग्रामीणों ने जताया आक्रोश
शिविर में समय पर सूचना नहीं मिलने से ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी गई। ग्रामीणों ने अतिरिक्त कलेक्टर प्रभा के समक्ष ठेकेदारों पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा कि जानबूझकर जनसुनवाई की सूचना नहीं दी गई। जैसे ही ग्रामीणों को जानकारी मिली, वे आनन-फानन में शिविर स्थल पर पहुंचे और आपत्तियां दर्ज करवाईं।
विकास कार्यों और पौधारोपण पर उठे सवाल
अधिकारियों द्वारा बजरी लीज से क्षेत्र में विकास की बात कहने पर सवाईपुर के बड़ला प्रशासक शिवराज जाट ने तीखा जवाब देते हुए कहा कि अब तक जितनी भी लीज दी गईं, उनसे न तो एक भी पौधा लगाया गया और न ही गांव में कोई ठोस विकास कार्य हुआ। इस पर अधिकारी असहज हो गए और आश्वासन दिया कि इस बार पौधारोपण किया जाएगा तथा स्कूल और सार्वजनिक स्थलों पर विकास कार्यों के लिए अलग-अलग राशि आवंटित की जाएगी।
बजरी परिवहन और मशीनों के इस्तेमाल पर जताई आपत्ति
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि सोपुरा गांव के बनास नदी क्षेत्र की करीब एक हजार बीघा भूमि से एक कण भी बजरी का परिवहन नहीं होने दिया जाएगा। साथ ही, उन्होंने एलएनटी और जेसीबी जैसी भारी मशीनों से बजरी दोहन का विरोध किया। ग्रामीणों का कहना था कि यदि केवल स्थानीय मजदूरों से काम कराया जाए, तो क्षेत्र के गरीब परिवारों को रोजगार मिलेगा और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। अधिकारियों ने इस मुद्दे पर भी ग्रामीणों को आश्वस्त किया।