पंचायत चुनाव:: खर्चा दबाने वाले पूर्व प्रत्याशियों पर गिरेगी गाज, चुनाव लड़ने पर लग सकती है रोक!

Update: 2026-01-17 03:44 GMT


भीलवाड़ा। प्रदेश में आगामी मार्च-अप्रैल में प्रस्तावित पंचायती राज चुनावों को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं, लेकिन कई पूर्व प्रत्याशियों के लिए यह खबर किसी झटके से कम नहीं है। राज्य चुनाव आयोग अब उन 'लापरवाह' पंच-सरपंच और जिला परिषद उम्मीदवारों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की तैयारी में है, जिन्होंने पिछले चुनाव में अपनी चुनावी फिजूलखर्ची का हिसाब आयोग को नहीं दिया था।

​तीन साल का 'वनवास' संभव

​राज्य चुनाव आयोग के कड़े नियमों के मुताबिक, चुनाव लड़ने वाले हर प्रत्याशी को परिणाम आने के 15 दिनों के भीतर अपने खर्च का पूरा ब्योरा देना अनिवार्य होता है। जिन्होंने ऐसा नहीं किया, आयोग उन्हें 3 साल के लिए अयोग्य घोषित कर सकता है। इसका सीधा मतलब यह है कि अगर आप पिछली बार मैदान में थे और हिसाब देना भूल गए, तो इस बार आपकी उम्मीदवारी पर संकट के बादल मंडरा सकते हैं।

​कलेक्टर्स को मिलने वाले हैं निर्देश

​सूत्रों की मानें तो राज्य चुनाव आयुक्त राजेश्वर सिंह जल्द ही सभी जिला कलेक्टरों को ऐसे प्रत्याशियों की सूची तैयार करने के दिशा-निर्देश जारी करेंगे। साल 2020 में हुए चुनावों में हजारों की संख्या में ऐसे प्रत्याशी थे, जिन्होंने हार या जीत के बाद खर्च का विवरण जमा नहीं कराया। अब आयोग इन डिफॉल्टरों की कुंडली खंगाल रहा है।

​बढ़ी हुई खर्च सीमा और सख्त निगरानी

​खास बात यह है कि इस बार आयोग ने चुनावी खर्च की सीमा में भी बढ़ोतरी की है, लेकिन पारदर्शिता को लेकर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। जिला निर्वाचन अधिकारी ब्लॉक स्तर से ऐसी लिस्ट मंगवाएंगे और फिर आयोग तय करेगा कि किन-किन दिग्गजों के चुनाव लड़ने पर पाबंदी लगाई जाए।

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