मौनी अमावस्या कल: 18 जनवरी को बनेगा विशेष पुण्य योग, मौन स्नान और दान से बरसेगी पितृ कृपा
भीलवाड़ा। माघ मास की पवित्र मौनी अमावस्या इस वर्ष रविवार, 18 जनवरी को विशेष आध्यात्मिक योगों के साथ मनाई जाएगी। शास्त्रों में इस तिथि को कार्तिक मास के समान ही शुभ और अक्षय पुण्य देने वाली माना गया है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस दिन मौन रहकर स्नान और दान करने से साधक को न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि पितृ दोषों से भी मुक्ति प्राप्त होती है।
तीर्थ स्नान का अश्वमेध यज्ञ जैसा फल
ज्योतिषी विक्रम सोनी ने बताया कि मौनी अमावस्या पर ब्रह्म मुहूर्त में मौन धारण कर स्नान करना अत्यंत फलदायी होता है। मान्यता है कि इस दिन किया गया तीर्थ स्नान अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य प्रदान करता है। यदि किसी कारणवश तीर्थ स्थान पर जाना संभव न हो, तो श्रद्धालु घर पर ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर तीर्थ स्नान का पूर्ण लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
पितृ तर्पण और दान का महत्व
इस दिन पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान का विशेष विधान है। पितृ कृपा प्राप्त करने के लिए निम्न विधियां अपनाई जा सकती हैं:
तर्पण विधि: जल में काले तिल डालकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पूर्वजों के नाम से जल अर्पित करें।
दीपदान: दक्षिण दिशा में तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करें।
पाठ: पितृ सूक्त और श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ करना पितृ दोष से मुक्ति दिलाता है।
इन वस्तुओं के दान से चमकेगा भाग्य
मौनी अमावस्या पर सेवा और दान का बड़ा महत्व बताया गया है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार, इस दिन कंबल, तिल, वस्त्र, उड़द, चावल, अनाज और आंवले का दान करना चाहिए। साथ ही:
चींटियों को आटा और शक्कर मिलाकर खिलाएं।
पक्षियों के लिए अनाज और गायों को हरा चारा खिलाना अत्यंत शुभ माना गया है।
जरूरतमंदों को भोजन या सामर्थ्य अनुसार दान देने से आध्यात्मिक उन्नति के द्वार खुलते हैं।
धार्मिक और आध्यात्मिक जगत की ऐसी ही खबरों के लिए पढ़ते रहें भीलवाड़ा हलचल।
