सौभाग्यशाली होते हैं वे जिन्हें भागवत अमृत पाने का अवसर मिले, संत दिग्विजयरामजी
भीलवाड़ा। शहर के रोडवेज बस स्टैंड के पास अग्रवाल उत्सव भवन में सोमवार को स्वर्गीय श्रीमती गीतादेवी तोषनीवाल चैरिटेबल ट्रस्ट के तत्वावधान में सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। रामद्वारा चित्तौड़गढ़ के रामस्नेही संत श्री दिग्विजयरामजी महाराज ने व्यासपीठ से कथा वाचन करते हुए कहा कि जो व्यक्ति श्रद्धा के साथ भागवत की गंगा में डुबकी लगाता है उसका जीवन सफल हो जाता है। श्रीमद भागवत इस लोक के साथ परलोक को भी संवारने वाली दिव्य कथा है और इसे सुनना परमात्मा की प्राप्ति का सशक्त माध्यम है।
कथा प्रारंभ से पूर्व प्रातः भव्य कलश शोभायात्रा निकाली गई। इसके साथ ही सात दिवसीय पंचकुण्डीय श्री विष्णु महायज्ञ का भी आरंभ हुआ। प्रथम दिन श्रीमद भागवत की स्थापना, महात्म्य पाठ और मंगलाचरण हुआ। संत दिग्विजयरामजी महाराज ने कहा कि भागवत मनोरंजन नहीं बल्कि मन को निर्मल करने का विषय है। इसके श्रवण से प्रभु हृदय में प्रवेश करते हैं। उन्होंने कहा कि संत जगाने आते हैं, सुलाने नहीं। यदि तन से कथा पंडाल में आए और मन भटकता रहे तो कथा का पूरा लाभ नहीं मिल पाता।
महाराजश्री ने सत्य के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सत्य का कभी अभाव नहीं होता और असत्य का कभी प्रभाव नहीं होता। सत्संग को जीवन का सबसे बड़ा आनंद बताते हुए उन्होंने कहा कि नींद और निंदा जीव के दो बड़े शत्रु हैं, जिन पर विजय पाने से ही प्रभु भक्ति और मोक्ष की राह प्रशस्त होती है।
कथा के दौरान भक्तिमय भजनों से समूचा पंडाल भक्ति रस में डूब गया। श्रीमद नारायण नारायण, भज गोविंदम और गढ़बोर बिराजा चारभुजा जैसे भजनों पर श्रद्धालु झूमते नजर आए। बुजुर्गों से लेकर महिलाओं तक सभी भाव विभोर होकर नृत्य करते रहे।
सुबह निकाली गई कलश यात्रा माणिक्यनगर स्थित हंसमुख बालाजी मंदिर से शुरू होकर विभिन्न मार्गों से होते हुए कथास्थल अग्रवाल उत्सव भवन पहुंची। संत दिग्विजयरामजी महाराज के सानिध्य में निकली यात्रा में सबसे आगे रथ पर भगवान चारभुजानाथ और स्वामी रामचरणजी महाराज के विग्रह विराजमान थे। सैकड़ों महिलाएं सिर पर कलश धारण किए हुए चल रही थीं, वहीं भक्तगण सिर पर साफा बांधे उत्साह के साथ शामिल हुए। आयोजक तोषनीवाल परिवार के सदस्य रामस्वरूप तोषनीवाल, दीपक तोषनीवाल और शुभम तोषनीवाल ने भागवत ग्रंथ को श्रद्धापूर्वक अपने सिर पर धारण कर यात्रा में भाग लिया।
कथा परिसर में प्रारंभ हुए पंचकुण्डीय श्री विष्णु महायज्ञ में पहले दिन यजमान दीपक तोषनीवाल और तपन झंवर ने प्रधान कुंड में तथा संजय लड्ढा, निलेश ईनाणी, सुनील मूंदड़ा और शुभम तोषनीवाल ने अन्य कुंडों में आहुतियां दीं। यह महायज्ञ प्रतिदिन सुबह आठ से दोपहर बारह तीस बजे तक विद्वान आचार्यों के सानिध्य में संपन्न होगा।
श्रीमद भागवत कथा प्रतिदिन दोपहर दो बजे से शाम छह बजे तक चलेगी। मंगलवार को कपिल देवहूति संवाद, सती चरित्र और ध्रुव चरित्र का प्रसंग सुनाया जाएगा। पांच फरवरी की रात आठ बजे से कथा स्थल पर भव्य नंद महोत्सव का आयोजन भी किया जाएगा।
