डिजिटल राजस्थान की जमीनी हकीकत: मंडियों में शोपीस बने डिस्प्ले बोर्ड, किसानों को नहीं मिल रहे ताजा भाव
भीलवाड़ा (हलचल)। प्रदेश की कृषि उपज मंडियों में किसानों को तकनीक से जोड़ने के लिए लगाए गए डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड अब केवल सफेद हाथी साबित हो रहे हैं। ई-नाम (राष्ट्रीय कृषि बाजार) योजना के तहत प्रदेश की 100 से अधिक मंडियों में लाखों रुपये खर्च कर ये बोर्ड लगाए गए थे ताकि किसानों को रियल टाइम भाव मिल सकें, लेकिन देखरेख के अभाव में 70 प्रतिशत बोर्ड या तो बंद हैं या पुराने रेट दिखा रहे हैं। अर्थव्यवस्था का आधार होने के बावजूद सीकर सहित प्रदेश के कई जिलों में किसानों की अनदेखी हो रही है। मंडी भाव की सही जानकारी नहीं मिलने से किसान मजबूरी में आढ़तियों द्वारा बताए गए दामों पर ही अपनी उपज बेच रहे हैं। किसानों का कहना है कि यदि बोर्ड पर अन्य जिलों की मंडियों के ताजा भाव दिखें तो वे अपनी उपज के लिए बेहतर बाजार का चुनाव कर सकते हैं, लेकिन इंटरनेट और ऑपरेटर की कमी ने इस योजना को ठप कर दिया है। मंडी समितियों का तर्क है कि धूप और बारिश के कारण डिस्प्ले बोर्ड खराब हुए हैं जिनकी समय पर मरम्मत नहीं हो पा रही है। बोर्ड के अपडेट न होने से मंडी व्यापार में पारदर्शिता कम हुई है। स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि मरम्मत का कार्य मुख्यालय स्तर से होना है और उच्चाधिकारियों को इस संबंध में अवगत कराया जा चुका है, लेकिन तब तक किसानों को अपनी ही फसल के सही दाम जानने के लिए भटकना पड़ रहा है।
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