खेजड़ी कटाई पर कठोर कानून की मांग

Update: 2026-02-14 10:48 GMT

भीलवाड़ा। राज्य सरकार द्वारा राज्य वृक्ष खेजड़ी की कटाई पर रोक लगाने के निर्णय का पर्यावरणविद् बाबूलाल जाजू ने स्वागत किया है। जाजू ने कहा कि 31 अक्टूबर 1983 को खेजड़ी को राज्य वृक्ष घोषित किया गया था। इसके अलावा 295 साल पहले खेजड़ी बचाने के लिए अमृता देवी विश्नोई ने अपनी दोनों बेटियों और 363 लोगों के साथ बलिदान दिया था। इसी के सम्मान में राज्य और देश का सबसे बड़ा पर्यावरण पुरस्कार भी अमृता देवी विश्नोई पुरस्कार के नाम से स्थापित है।

जाजू ने बताया कि विश्नोई समाज के संतों और लाखों लोगों द्वारा बीकानेर में खेजड़ी की कटाई रोकने के लिए किए गए धरना प्रदर्शन के परिणामस्वरूप ही सरकार खेजड़ी की कटाई पर रोक लगाने और कानून बनाने के लिए बाध्य हुई।

उन्होंने मुख्यमंत्री और वनमंत्री से अपील की कि प्रस्तावित कानून में खेजड़ी की अवैध कटाई पर कठोर दंड, भारी आर्थिक जुर्माना और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के प्रावधान शामिल किए जाएं, ताकि खेजड़ी की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और भविष्य में इसे नुकसान न पहुंचे।

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