महात्मा ज्योतिबा फुले जयंती पर भीलवाड़ा में शोभायात्रा निकली
भीलवाड़ा। समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती के अवसर पर भीलवाड़ा में माली समाज द्वारा आयोजित भव्य शोभायात्रा ने शहर को उत्सवमय बना दिया। हजारों की संख्या में महिलाओं, पुरुषों एवं युवा शक्ति की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने इस आयोजन को ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया।
शोभायात्रा की शुरुआत संत-महात्माओं के सान्निध्य में विधिवत रूप से की गई, जिससे आयोजन को आध्यात्मिक गरिमा भी प्राप्त हुई। विशाल वाहन रैली के रूप में निकली इस शोभायात्रा में समाज के विभिन्न वर्गों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले की आकर्षक झांकियों तथा देशभक्ति एवं समाज जागरूकता के नारों के साथ पूरा शहर फुलेमय नजर आया। युवाओं में खासा जोश देखने को मिला, वहीं महिलाओं की सक्रिय भागीदारी ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाया।
जयंती के अवसर पर समाज के आह्वान पर भीलवाड़ा की सभी सब्जी मंडियां पूर्णतः बंद रहीं, जिससे समाज की एकजुटता और महात्मा फुले के प्रति सम्मान स्पष्ट रूप से झलकता है। शोभायात्रा के प्रमुख मार्गों एवं सुबह की मंडी क्षेत्र में समाज बंधुओं के साथ अनेक संगठनों और व्यापारी वर्ग द्वारा विभिन्न स्थानों पर पुष्प वर्षा कर भव्य स्वागत किया गया। साथ ही जगह-जगह अल्पाहार एवं पेयजल की उत्कृष्ट व्यवस्था कर अतिथियों और प्रतिभागियों का सत्कार किया गया।
महात्मा ज्योतिबा फुले का जीवन व योगदान
महात्मा ज्योतिबा फुले का जन्म 11 अप्रैल 1827 को महाराष्ट्र के पुणे में हुआ था। उन्होंने समाज में व्याप्त जातिगत भेदभाव, छुआछूत और महिलाओं की अशिक्षा के खिलाफ आजीवन संघर्ष किया। उन्होंने अपनी पत्नी सावित्रीबाई फुले के साथ मिलकर देश की पहली बालिका विद्यालय की स्थापना की, जो उस समय एक क्रांतिकारी कदम था।
फुले ने ‘सत्यशोधक समाज’ की स्थापना कर समाज में समानता, शिक्षा और न्याय का संदेश फैलाया। उन्होंने दलितों, पिछड़ों और महिलाओं को शिक्षा के माध्यम से सशक्त बनाने का कार्य किया। उनके प्रयासों से समाज में नई जागरूकता आई और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ एक मजबूत आंदोलन खड़ा हुआ।
इस अवसर पर रेल्वे स्टेशन स्थित भीमराव जी अम्बेडकर की मूर्ति पर भी समाज बंधुओं द्वारा पुष्पांजलि अर्पित की। शोभायात्रा में वक्ताओं ने महात्मा फुले के सामाजिक सुधार, शिक्षा के प्रसार और समानता के संदेश को आत्मसात करने का आह्वान किया। आयोजन ने न केवल समाज में एकता का संदेश दिया, बल्कि नई पीढ़ी को अपने महान आदर्शों से जुड़ने की प्रेरणा भी दी।
