सहाड़ा में 'खनन माफिया' का नंगा नाच: गोचर भूमि पर रात भर चल रही जेसीबी, खोदे 200 अवैध गड्ढे, सो रहा प्रशासन
बागोर (हलचल/ कैलाश शर्मा)। सहाड़ा विधानसभा क्षेत्र के गंगापुर शहर से सटे शिवरती इलाके में खनन माफिया ने तबाही मचा रखी है। यहाँ खसरा नंबर 724, 694 और 691 की चारागाह व गोचर भूमि को जेसीबी और एलएनटी मशीनों से छलनी किया जा रहा है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि दिन-दहाड़े और रात के अंधेरे में हो रहे इस अवैध खनन पर तहसीलदार, पटवारी और विकास अधिकारी पूरी तरह मौन साधे हुए हैं, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
बालाजी तालाब के अस्तित्व पर संकट
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, शिवरती इलाके में बालाजी तालाब के पास करीब 200 अवैध गड्ढे खोद दिए गए हैं। ये गड्ढे 30 फीट तक गहरे हैं, जिसके कारण तालाब में पानी की आवक पूरी तरह बंद हो गई है। नतीजा यह है कि आसपास के किसानों के कुएं सूख चुके हैं और सिंचाई पर संकट खड़ा हो गया है। प्राकृतिक स्वरूप पूरी तरह खत्म होने से बेजुबान आवारा पशुओं के लिए घास तक नहीं बची है।
दिन में मजदूर, रात को मशीनें: खनन का 'डेथ मोड'
खनन माफिया का तरीका बेहद शातिर है। रात के समय जेसीबी और भारी मशीनों से अवैध खुदाई की जाती है और दिन के उजाले में मजदूरों के जरिए मायका (अभ्रक) और पत्थर निकालकर डंपर भर-भरकर ऊंचे दामों पर बेचे जा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कई बार अधिकारियों को सूचित किया, लेकिन कार्रवाई के नाम पर 'शून्य' हासिल हुआ।
अधिकारियों की मिलीभगत या मजबूरी?
शिवरती के निवासियों का सीधा आरोप है कि ग्राम पंचायत और संबंधित विभागों के अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतना बड़ा खेल संभव नहीं है। जब भी ग्रामीण विरोध करते हैं, तो खनन माफिया उन्हें जान से मारने की धमकियां देते हैं। प्रशासन की चुप्पी के कारण माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें कानून का कोई डर नहीं रह गया है।
> ग्रामीणों की चेतावनी: > "अगर जल्द ही इन 200 अवैध गड्ढों को बंद नहीं किया गया और खनन नहीं रुका, तो बालाजी तालाब पूरी तरह खत्म हो जाएगा। चारागाह भूमि नहीं बची तो पशु कहां जाएंगे? प्रशासन की चुप्पी यह साबित करती है कि माफिया को संरक्षण प्राप्त है।"
