राजस्थान में RTE प्रवेश पर 'पैन' का पहरा: गरीब बच्चों की राह में नई दीवार, देशभर में इकलौता राज्य बना
भीलवाड़ा । राजस्थान में शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत निजी स्कूलों की 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों पर होने वाले मुफ्त प्रवेश इस बार विवादों के घेरे में आ गए हैं। शिक्षा विभाग द्वारा आवेदन प्रक्रिया में 'पैन कार्ड' (PAN Card) की अनिवार्यता लागू करने से हजारों गरीब परिवारों के सामने अपने बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाने का सपना टूटता नजर आ रहा है। राजस्थान देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जहाँ RTE प्रवेश के लिए पैन कार्ड को अनिवार्य दस्तावेज बनाया गया है।
कड़े नियम: FIR और दोगुनी फीस की चेतावनी
विभाग ने केवल पैन कार्ड ही अनिवार्य नहीं किया है, बल्कि आय प्रमाण-पत्र को लेकर बेहद सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
दोगुनी वसूली: यदि आय प्रमाण-पत्र में कोई गड़बड़ी पाई जाती है, तो प्रवेश निरस्त करने के साथ-साथ अभिभावक से दोगुनी फीस वसूल की जाएगी।
कानूनी कार्रवाई: गलत जानकारी देने पर संबंधित अभिभावक के खिलाफ FIR दर्ज कराने की चेतावनी भी दी गई है।
तर्क: शिक्षा विभाग का कहना है कि यह कदम फर्जी आय प्रमाण-पत्रों के जरिए संपन्न परिवारों द्वारा हक मारने की प्रवृत्ति को रोकने के लिए उठाया गया है।
6 मार्च को निकलेगी लॉटरी, पर संशय बरकरार
सत्र 2026-27 के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 20 फरवरी से शुरू होकर 4 मार्च को समाप्त हो चुकी है। अब 6 मार्च को चयन के लिए राज्य स्तरीय लॉटरी निकाली जाएगी। नियम के अनुसार, 2.5 लाख रुपए से कम वार्षिक आय वाले परिवारों के बच्चे ही इस योजना के पात्र हैं। नए प्रावधान के तहत अब राशन कार्ड, आधार और निवास प्रमाण-पत्र के साथ पैन कार्ड की कॉपी भी पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य कर दिया गया है।
विरोध: "गरीब के पास पैन कार्ड कहाँ से आएगा?"
इस नए प्रावधान का सामाजिक कार्यकर्ताओं और अभिभावकों ने पुरजोर विरोध शुरू कर दिया है। जानकारों का कहना है कि:
दस्तावेजी बाधा: दिहाड़ी मजदूरी करने वाले अधिकांश गरीब परिवारों के पास पैन कार्ड नहीं होता। अचानक इस नियम के आने से कई पात्र बच्चे आवेदन से वंचित रह गए हैं।
अन्य राज्यों की स्थिति: महाराष्ट्र, पंजाब और उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में भी ऐसी कोई अनिवार्यता नहीं है।
पारदर्शिता का अभाव: लोगों का कहना है कि अगर फर्जीवाड़े को रोकना है तो जांच व्यवस्था पारदर्शी होनी चाहिए, न कि गरीब पर दस्तावेजों का बोझ लादना चाहिए।
